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SHREE SHARMA

223 days ago

मानव शरीर 24 तत्वों से बना है, जो पाँच महाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और आकाश) और तीन गुणों (सत्व, रजस, और तमस) के संयोजन से बनते हैं। यहाँ मानव शरीर के 24 तत्व हैं: ⚜️5 महाभूत हैं: 1. *पृथ्वी (भूमि)*: यह ठोस पदार्थों का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे कि मिट्टी, पत्थर, और धातु। 2. *जल (पानी)*: यह तरल पदार्थों का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे कि पानी, रक्त, और अन्य तरल पदार्थ। 3. *अग्नि (आग)*: यह ऊर्जा और गर्मी का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे कि आग, बिजली, और शरीर की गर्मी। 4. *वायु (हवा)*: यह गैसों का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे कि हवा, ऑक्सीजन, और अन्य गैसें। 5. *आकाश (खाली स्थान)*: यह खाली स्थान और शून्यता का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे कि आकाश, अंतरिक्ष, और हमारे भीतर की खाली जगह। ये 5 महाभूत हमारे आसपास के विश्व को बनाने वाले मूल तत्व हैं और हमारे शरीर में भी पाए जाते हैं। ⚜️ 5 ज्ञानेन्द्रिय हैं: 1. *आँख (नेत्र)*: यह देखने की इंद्रिय है, जो हमें रंग, आकार, और रूप को देखने में मदद करती है। 2. *कान (श्रोत)*: यह सुनने की इंद्रिय है, जो हमें ध्वनि और शब्दों को सुनने में मदद करती है। 3. *नाक (घ्राण)*: यह सूँघने की इंद्रिय है, जो हमें गंध और सुगंध को सूँघने में मदद करती है। 4. *जीभ (रसना)*: यह स्वाद लेने की इंद्रिय है, जो हमें मीठा, नमकीन, खट्टा, और कड़वा स्वाद को पहचानने में मदद करती है। 5. *त्वचा (स्पर्श)*: यह स्पर्श करने की इंद्रिय है, जो हमें गर्मी, ठंडक, दर्द, और दबाव को महसूस करने में मदद करती है। ये 5 ज्ञानेन्द्रिय हमें अपने आसपास के विश्व को अनुभव करने और समझने में मदद करती हैं। ⚜️5 कर्मेन्द्रियाँ हैं: 1. *वाणी (मुख)*: यह बोलने और शब्दों को उच्चारण करने की इंद्रिय है। 2. *हाथ (पाणि)*: यह काम करने और वस्तुओं को पकड़ने की इंद्रिय है। 3. *पैर (पाद)*: यह चलने और गति करने की इंद्रिय है। 4. *गुदा (पायु)*: यह मल त्यागने की इंद्रिय है। 5. *जननेंद्रिय (उपस्थ)*: यह प्रजनन और मूत्र त्यागने की इंद्रिय है। ये 5 कर्मेन्द्रिय हमें अपने शरीर के विभिन्न कार्यों को करने में मदद करती हैं और हमारे जीवन को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ⚜️5 तन्मात्रा हैं: 1. *शब्द तन्मात्रा*: यह शब्द या ध्वनि का तन्मात्रा है, जो कान के माध्यम से अनुभव किया जाता है। 2. *स्पर्श तन्मात्रा*: यह स्पर्श या छूने का तन्मात्रा है, जो त्वचा के माध्यम से अनुभव किया जाता है। 3. *रूप तन्मात्रा*: यह रूप या रंग का तन्मात्रा है, जो आँखों के माध्यम से अनुभव किया जाता है। 4. *रस तन्मात्रा*: यह स्वाद या रस का तन्मात्रा है, जो जीभ के माध्यम से अनुभव किया जाता है। 5. *गंध तन्मात्रा*: यह गंध या सूँघने का तन्मात्रा है, जो नाक के माध्यम से अनुभव किया जाता है। ये 5 तन्मात्रा पाँच महाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और आकाश) के मूल तत्व हैं और इन्हीं से हमारे अनुभव और ज्ञान उत्पन्न होते हैं। इसके अतिरिक्त मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त यह मिलकर 24 तत्त्व है

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Comments (4)

vijay kushwaha

vijay kushwaha

Jan 19, 2026

हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Jan 19, 2026

जय हो मां पार्वती भोलेनाथ जी की 🙏

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Jan 19, 2026

भोलेनाथ की जय! 🙏💫 भगवान शिव की कृपा से आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आये। 🌟🙏 आपके जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिले। 🙏🌈 हर हर महादेव! 🙏💫 बम बम भोले! 🙏💥

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jan 19, 2026

🙏🔱 Har Har Mahadev 🔱🙏 Subha Somavar 🌹 Shubha Kamanayen 🌹 Subha Dopahar Jii 🌹❤️🌹