
SHREE SHARMA
356 days ago
महात्मा रूचिकृत #पितृस्तोत्र !! मार्कण्डेयपुराण में महात्मा रूचि द्वारा की गई पितरों की यह स्तुति 'पितृ स्तोत्र' कहलाता है। पितरों की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिये इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है। इस स्तोत्र की बड़ी महिमा है। मार्कंडेय पुराण (९४/३-१३) में वर्णित इस चमत्कारी पितृ स्तोत्र का नियमित पाठ करने से पितृ प्रसन्न होते है। 🍁महात्मा रूचिकृत पितृस्तोत्र!! 🍁अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् । नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ।। जो सबके द्वारा पूजित, अमूर्त, अत्यन्त तेजस्वी, ध्यानी तथा दिव्य दृष्टि सम्पन्न हैं, उन पितरों को मैं सदा नमस्कार करता हूं। 🍁इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा । सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।। जो इन्द्र आदि देवताओं, दक्ष, मारीच, सप्तर्षियों तथा दूसरों के भी नेता हैं, कामना की पूर्ति करने वाले उन पितरों को मैं प्रणाम करता हूं। 🍁मन्वादीनां मुनीन्द्राणां सूर्याचन्द्रमसोस्तथा । तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि ।। जो मनु आदि राजर्षियों, मुनिश्वरों तथा सूर्य और चन्द्रमा के भी नायक हैं, उन समस्त पितरों को मैं जल और समुद्र में भी नमस्कार करता हूं। 🍁नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा। द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलिः ।। नक्षत्रों, ग्रहों, वायु, अग्नि, आकाश और युलोक तथा पृथ्वी के भी जो नेता हैं. उन पितरों को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूं। 🍁देवर्षीणां जनिंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्। अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येऽहं कृताञ्जलिः ।। जो देवर्षियों के जन्मदाता, समस्त लोकों द्वारा वन्दित तथा सदा अक्षय फल के दाता हैं. उन पितरों को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूं। 🍁प्रजापतेः कश्यपाय सोमाय वरुणाय च । योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलिः ।। प्रजापति, कश्यप, सोम, वरूण तथा योगेश्वरों के रूप में स्थित पितरों को सदा प्रणाम करता हूं। 🍁नमो गणेभ्यः सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु । स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।। सातों लोकों में स्थित सात पितृगणों को नमस्कार है। मैं योग दृष्टि सम्पन्न स्वयम्भू ब्रह्माजी को प्रणाम करता हूं। 🍁सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा । नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।। चन्द्रमा के आधार पर प्रतिष्ठित तथा योगमूर्तिधारी पितृगणों को मैं प्रणाम करता हूं। साथ ही सम्पूर्ण जगत् के पिता सोम को नमस्कार करता हूं। 🍁अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् । अग्नीषोममयं विश्वं यत एतदशेषतः ।। अग्निस्वरूप अन्य पितरों को मैं प्रणाम करता हूं. क्योंकि यह सम्पूर्ण जगत् अग्नि और सोममय है। 🍁ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तयः। जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिणः ।। जो पितर तेज में स्थित हैं, जो ये चन्द्रमा, सूर्य और अग्नि के रूप में दृष्टि गोचर होते हैं तथा जो जगत्स्वरूप एवं ब्रह्मस्वरूप हैं, 🍁तेभ्योऽखिलेभ्यो योगिभ्यः पितृभ्यो यतमानसः । नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुजः ।। उन सम्पूर्ण योगी पितरों को मैं एकाग्रचित्त होकर प्रणाम करता हूं। उन्हें बारम्बार नमस्कार है, वे स्वधा भोजी पितर मुझ पर प्रसन्न हों। ।। इति महात्मा रूचिकृत पितृ स्तोत्र संपूर्णम्।। (मार्कंडेय पुराणोक्त)

Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Sep 8, 2025
ॐ नमो नारायणा नमः 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Sep 8, 2025
🙏‼️ Om Namo Bhagavate Vasudevaya Namah ‼️🙏
