MyMandirInstall
Profile

SHREE SHARMA

419 days ago

वेदसार शिवस्तव: पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम्। जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम्।। सभी जीवोंके रक्षक , पापनाशन,परमेश्वर, गजचर्म धारण करनेवाले, गङ्गाधर तथा कामदेव को मारने वाले एकमात्र भगवान श्री महादेव का मैं स्मरण करता हूॅं। महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम्। सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम्।। चन्द्रमा, सूर्य और अग्नि जिनके तीन नेत्र हैं, जो देवोंके विपदों से रक्षा करते हैं उन विभु, विश्वनाथ, विभूति भूषण, नित्यानन्द-स्वरूप, पञ्चमुख महादेव की मैं स्तुति करता हूॅं। गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं गवेन्द्राधिरूढं गुणातीतरूपम्। भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम्।। जो कैलाशनाथ हैं, गणनाथ हैं, नीलकण्ठ हैं, बृषभ सवार हैं, अनगिनत रूप वाले हैं, भव हैं, प्रकाश स्वरूप हैं, शरीर में भस्म लगाए हुए हैं और माता पार्वती जिनकी अर्धाङ्गिनी हैं, उन पञ्चमुख महादेव को मैं नमस्कार करता हूॅं। शिवाकान्त शंभो शशाङ्कार्धमौले महेशान शूलिञ्जटाजूटधारिन्। त्वमेको जगद्व्यापको विश्वरूपः प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूप।। हे पार्वतीपते! हे चन्द्रशेखर ! हे महेश्वर ! हे शूलिन ! हे जटाधारी ! हे विश्वरूप ! एकमात्र आप ही जगत में व्यापक हैं, हे पूर्ण रूप प्रभु ! प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए। परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं निरीहं निराकारमोंकारवेद्यम्। यतो जायते पाल्यते येन विश्वं तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्।। जो परमात्मा हैं, एक हैं, जगत के आदि बीज-स्वरूप हैं, निरीह हैं, निराकार हैं और प्रणवद्वारा जानने योग्य हैं तथा जिनसे सम्पूर्ण जगत् की उत्पत्ति और और पालन होता है और फिर जिनमें उसका लय होता है, उन प्रभु को मैं भजता हूॅं। न भूमिर्न चापो न वह्निर्न वायु र्न चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा। न चोष्णं न शीतं न देशो न वेषो न यस्यास्ति मूर्तिस्त्रिमूर्तिं तमीडे।। जो न पृथ्वी हैं, न जल हैं, न अग्नि हैं, न वायु हैं और न आकाश हैं, न तन्द्रा हैं, न निद्रा है, न ग्रीष्म हैं और न शीत हैं तथा जिनका न ही अपना कोई देश है, न ही कोई वेष है, उन मूर्तिहीन त्रिमूर्ति की मैं स्तुति करता हूॅं। अजं शाश्वतं कारणं कारणानां शिवं केवलं भासकं भासकानाम्। तुरीयं तमःपारमाद्यन्तहीनं प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम्।। जो जन्मरहित हैं, शाश्वत हैं, आदिकारण हैं, कल्याण स्वरूप हैं, एक हैं, प्रकाश के भी प्रकाशक हैं, अवस्थात्रय से विलक्षण हैं, विज्ञान से परे हैं, आदि-अन्त हीन हैं, उन परम पावन अद्वैत स्वरूप को मैं प्रणाम करता हूॅं। नमस्ते नमस्ते विभो विश्वमूर्ते नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते। नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्य।। हे विश्वमूर्ते ! हे विभो ! आपको नमस्कार है, हे चिदानन्दमूर्ते ! आपको नमस्कार है, हे तप-योग से गम्य प्रभो, आपको नमस्कार है, हे श्रुतिगम्य भगवन् ! आपको नमस्कार है । प्रभो शूलपाणे विभो विश्वनाथ महादेव शम्भो महेश त्रिनेत्र। शिवाकान्त शान्त स्मरारे पुरारे त्वदन्यो वरेण्यो न मान्यो न गण्यः।। हे प्रभो ! हे शूल पाने ! हे विभो ! हे विश्वनाथ ! हे महादेव ! हे शम्भो ! हे महेश्वर ! हे त्रिलोचन ! हे पार्वतीकान्त !, हे शान्त ! हे कामारि ! हे त्रिपुरारि ! आपके अतिरिक्त न ही कोई श्रेष्ठ है, न ही मान्यहै और न ही कोई गण्य है। शंभो महेश करुणामय शूलपाणे गौरीपते पशुपते पशुपाशनाशिन्। काशीपते करुणया जगदेतदेक स्त्वं हंसि पासि विदधासि महेश्वरोऽसि।। हे शम्भो ! हे महेश्वर ! हे करुणामय ! हे शूलपाणी ! हे पार्वतीपते ! हे पशुपते ! हे जीव को संसार-बन्धन से मुक्त करनेवाले ! हे काशाीश्वर ! - एक आप ही करुणावश इस जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार करते हैं। हे प्रभु ! आप ही इसके एकमात्र स्वामी हो। त्वत्तो जगद्भवति देव भव स्मरारे त्वय्येव तिष्ठति जगन्मृड विश्वनाथ। त्वय्येव गच्छति लयं जगदेतदीश लिङ्गात्मके हर चराचरविश्वरूपिन्।। हे प्रभु ! हे भव ! हे मदनान्तकारी ! यह लिङ्ग-स्वरूप सम्पूर्ण जगत आप ही से उत्पन्न होता है, आप ही में स्थिर रहता है और आप ही में लय होता है। चराचर विश्वरूपिण आपको मैं सदैव ध्यान करता हूँ। 🌸🌸🌸🌸🌸 ॐ नम: शिवाय 🌸🌸🌸🌸🌸

Post media

Comments (3)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jul 7, 2025

Har Har Mahadev 🙏🌿🔱🌺

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Jul 7, 2025

जय भोलेनाथ जी 🙏

koshal mehra

koshal mehra

Jul 7, 2025

Har har mahadev ji 🙏