
SHREE SHARMA
356 days ago
ॐ - तीन अक्षरों में ब्रह्मांड। ॐ प्रतीक तीन मूल ध्वनियों - अ, उ और म से मिलकर बना है और इसके ऊपर एक अर्धचंद्र और बिंदु अंकित है। इस पवित्र प्रतीक के कई अर्थ हैं, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं: 1. चेतना की अवस्थाएँ: - अ: जागृत अवस्था (जागृत) का प्रतिनिधित्व करता है - उ: स्वप्न अवस्था (स्वप्न) का प्रतिनिधित्व करता है - म: गहरी, स्वप्नहीन निद्रा (सुषुप्ति) का प्रतिनिधित्व करता है - अर्धचंद्र और बिंदु वाला पूरा प्रतीक शुद्ध चेतना (तुरीय) की चौथी, पारलौकिक अवस्था का प्रतिनिधित्व करता है 2. मानवीय अनुभव के पहलू: - अ: वाणी (वाक) का प्रतिनिधित्व करता है - उ: मन (मानस) का प्रतिनिधित्व करता है - म: जीवन शक्ति (प्राण) का प्रतिनिधित्व करता है - पूरा प्रतीक जीवित आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है जो दिव्य आत्मा का एक अंश है। 3. भौतिक आयाम: - तीन अक्षर लंबाई, चौड़ाई और गहराई का प्रतिनिधित्व करते हैं। पूरा प्रतीक दिव्यता का प्रतिनिधित्व करता है, जो आकार और रूप की सीमाओं से परे विद्यमान है। 4. आध्यात्मिक गुण: - ये अक्षर इच्छा, भय और क्रोध से मुक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं - पूरा प्रतीक पूर्ण पुरुष (स्थित प्रज्ञा) का प्रतीक है, जिसका ज्ञान दिव्यता में दृढ़ता से स्थापित है। 5. सृष्टि: - अक्षर पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और तटस्थ लिंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। - पूर्ण प्रतीक संपूर्ण सृष्टि और उसके रचयिता का प्रतिनिधित्व करता है। 6. सार्वभौमिक गुण: - अ, उ, म तीन गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं: सत्व (पवित्रता), रजस (सक्रियता) और तमस् (जड़ता)। - पूर्ण इन गुणों से परे उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करता है। 7. काल: - अक्षर भूत, वर्तमान और भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। - पूर्ण प्रतीक सृष्टिकर्ता का प्रतीक है, जो समय की सीमाओं से परे है। 8. ज्ञान के स्रोत: - अक्षर माता, पिता और आध्यात्मिक गुरु की शिक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। - संपूर्ण प्रतीक ब्रह्म विद्या का प्रतिनिधित्व करता है। 9. योगाभ्यास: - अक्षर आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार का प्रतिनिधित्व करते हैं। - पूर्ण प्रतीक समाधि की सर्वोच्च ध्यान अवस्था का प्रतिनिधित्व करता है। 10. दिव्य त्रिमूर्ति: - अक्षर ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता), विष्णु (पालक) और शिव (संहारक) का प्रतिनिधित्व करते हैं। - समग्र अपरिवर्तनशील परम सत्य (ब्रह्म) का प्रतिनिधित्व करता है। 11. आत्म-साक्षात्कार: - अक्षर "वह तू है" (तत् त्वम् असि) का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो एक मूलभूत आध्यात्मिक सत्य है। यह संपूर्ण प्रतीक इस बोध का प्रतीक है, जो मानव आत्मा को उसके शरीर, मन, बुद्धि और अहंकार की सीमाओं से मुक्त करता है। ॐ - ब्रह्मांड की ध्वनि, अस्तित्व का सार। इसका दर्शन वेदों और उपनिषदों से गहराई से मेल खाता है: 1/ मांडूक्य उपनिषद: "ॐ संपूर्ण ब्रह्मांड है। भूत, वर्तमान और भविष्य - जो कुछ था, जो कुछ है, जो कुछ होगा - वह ॐ है।" (मांडूक्य उपनिषद, श्लोक 1) 2/ छांदोग्य उपनिषद: "अविनाशी ध्वनि ॐ का ध्यान करो। यह धनुष है; आत्मा बाण है, और ब्रह्म लक्ष्य है।" (छांदोग्य उपनिषद 1.1.1) 3/ भगवद् गीता: "शब्दों में, मैं ॐ अक्षर हूँ।" (भगवद्गीता 10.25) ॐ काल, स्थान और रूप से परे है, शुद्ध चेतना (तुरीय) का प्रतीक है। यह सृष्टि, पालन और संहार—ब्रह्मा, विष्णु, शिव—का प्रतीक है। ॐ का सच्चा ध्यान मोक्ष की ओर ले जाता है।

Comments (3)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Sep 8, 2025
हरी ॐ नमः 🌹🌹 🙏

Rama Devi Sahu
Sep 8, 2025
🙏‼️ Hari Om ‼️🙏 Bhagwan ki Aasirbad se Aap Hamesha Khush Rahe Swasth or Surakshit Rahe 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Sep 8, 2025
🕉️🕉️🕉️ OM 🕉️🕉️🕉️ Brahmanda ka Naad hai 🕉️ Brahamnaad ka Dhwani.... Om... Bahut hi Sundar Bhavarth ki Sath... Upasthapana 👌👌🙏
