
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
102 days ago
## राष्ट्रीय संत बाबा सीताराम दास (गुजरात): राष्ट्र के लिए सर्वस्व अर्पण करने वाले महान संत गुजरात के महान स्वतंत्रता सेनानी और अध्यात्म के शिखर पुरुष **बाबा सीताराम दास जी** (जिन्हें देश 'राष्ट्रीय संत' के रूप में नमन करता है) का जीवन राष्ट्रभक्ति और त्याग की एक ऐसी अनूठी मिसाल है, जो इतिहास में विरली ही देखने को मिलती है। राष्ट्र सेवा और स्वतंत्रता संग्राम के लिए उन्होंने अपना सब कुछ यहाँ तक कि **अपने शरीर के वस्त्र भी नीलाम कर दिए थे।** ### सर्वस्व दान की ऐतिहासिक घटना भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और देश के एकीकरण के समय, राष्ट्र को आर्थिक संबल देने के लिए कई दानवीरों ने अपनी संपत्ति समर्पित की थी। लेकिन बाबा सीताराम दास जी का त्याग सबसे अनूठा और भावुक करने वाला था: * **कपड़ों की नीलामी:** जब देश को संसाधनों और धन की अत्यंत आवश्यकता थी, तब बाबा सीताराम दास जी के पास कोई भौतिक धन-दौलत या बैंक बैलेंस नहीं था। वे एक सन्यासी थे। उन्होंने राष्ट्रहित के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से अपने शरीर पर धारण किए हुए वस्त्रों (खादी के कपड़ों) तक की नीलामी करवा दी थी। * **जनता की श्रद्धा:** एक संत के वस्त्रों को देश के लिए नीलाम होते देख वहां मौजूद जनता की आंखें भर आई थीं। लोगों ने उन वस्त्रों को पाने के लिए और देश के खजाने में योगदान देने के लिए अपनी हैसियत से कहीं बढ़कर बढ़-चढ़कर बोलियां लगाई थीं। ### बाबा सीताराम जी का व्यक्तित्व और योगदान > **"तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित..."** > यह पंक्तियाँ बाबा सीताराम जी के जीवन पर पूरी तरह सटीक बैठती हैं। > * **महात्मा गांधी और सरदार पटेल के सहयोगी:** बाबा सीताराम जी का गुजरात के स्वतंत्रता आंदोलन, बारदोली सत्याग्रह और खादी प्रचार में बहुत बड़ा योगदान था। वे पूज्य बापू और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के विचारों से गहरे जुड़े थे। * **अहिंसा और समाज सुधार:** उन्होंने न केवल आजादी की लड़ाई लड़ी, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास, छुआछूत और कुप्रथाओं के खिलाफ भी जीवनभर अलख जगाई। * **त्याग की प्रतिमूर्ति:** एक ऐसे समय में जब लोग अपनी संपत्ति बचाने के रास्ते ढूंढते थे, इस महान संत ने सिद्ध कर दिया कि राष्ट्र से बड़ा कोई धर्म नहीं होता और राष्ट्र के लिए यदि खुद के वस्त्र भी दान करने पड़ें, तो एक सन्यासी के लिए उससे बड़ा कोई सौभाग्य नहीं है। गुजरात की इस पवित्र भूमि और राष्ट्रीय संत बाबा सीताराम दास जी के इस परम त्याग को संपूर्ण भारतवर्ष हमेशा अत्यंत आदर और गर्व के साथ याद रखता है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि देश के प्रति हमारी निष्ठा और त्याग की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए।
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