
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
100 days ago
#वास्तुदेवता उत्पत्ति कथा!! प्राचीन काल में भगवान शिव और अंधकासुर के बीच एक अत्यंत भयंकर युद्ध हुआ था। अंधकासुर को यह वरदान प्राप्त था कि उसकी रक्त की बूंदें जहाँ भी गिरेंगी, वहाँ से नए अंधकासुर उत्पन्न हो जाएंगे। इस भीषण युद्ध के दौरान भगवान शिव के मस्तक से पसीने की एक बूंद धरती पर गिरी। उस पसीने की बूंद से एक विशाल और भयंकर मुख वाला प्राणी उत्पन्न हुआ। वह इतना बड़ा था कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह पूरी पृथ्वी को ही निगल जाएगा। भगवान शिव की प्रेरणा से उस प्राणी ने धरती पर गिरे अंधकासुर के सारे रक्त को पी लिया, जिससे अंधकासुर का पूरी तरह से नाश हो गया। त्रिलोक को निगलने का प्रयास और देवताओं का निवास अंधकासुर का रक्त पीने के बाद भी उस भयानक प्राणी की भूख शांत नहीं हुई। भूख और क्रोध में आकर उसने पूरे त्रिलोक को निगलने का प्रयास किया। यह देखकर भगवान शिव ने उसे रोका और धरती पर पटक दिया। वह प्राणी दोबारा उठकर संसार का विनाश न कर सके, इसके लिए भगवान शिव की आज्ञा से 45 देवी-देवता उसके शरीर पर आकर बैठ गए और उसे भूमि पर दबा दिया। जब उसे पृथ्वी पर गिराया गया था, तब उसका मुख ईशान कोण में, बायाँ हाथ वायव्य कोण में, दायाँ हाथ आग्नेय कोण में और दोनों पैर नैऋत्य कोण में थे। देवताओं के भारी वजन के कारण वह उठ नहीं पा रहा था। ब्रह्मा जी का वरदान उस पुरुष ने अपनी इस दयनीय स्थिति को देखकर देवताओं से अत्यंत विनम्रतापूर्वक प्रार्थना की कि यदि आप सब मुझे इस तरह दबाकर रखेंगे, तो मैं कैसे जीवित रहूँगा? उसकी इस विनम्रता से प्रसन्न होकर परमपिता ब्रह्मा जी ने उसे अपना मानस पुत्र स्वीकार किया और उसे 'वास्तु' नाम दिया। ब्रह्मा जी ने उसे वरदान देते हुए कहा कि: वैश्वदेव यज्ञ के अंत में जो भी बलि (भोजन) दी जाएगी, वह उसका आहार बनेगी। घर के निर्माण या वास्तु शांति के समय यज्ञ में जो सामग्री अर्पित की जाएगी, वह उसे प्राप्त होगी। जो व्यक्ति अपने घर के निर्माण के समय तुम्हारी (वास्तु देव की) पूजा नहीं करेगा, उसे तुम अपने आहार के रूप में ग्रहण कर सकोगे। इस प्रकार वरदान प्राप्त करने के बाद वास्तु पुरुष हमेशा के लिए उसी अवस्था में भूमि पर स्थित हो गए। 45 देवताओं की स्थिति और महत्व वास्तु पुरुष के शरीर को दबाकर रखने वाले 45 देवताओं में से 32 देवता उनके शरीर के बाहरी हिस्से में और 13 देवता शरीर के आंतरिक हिस्से में निवास करते हैं। इसी कारण से जब भी किसी नए घर या भवन का निर्माण कार्य शुरू होता है, तो सबसे पहले वास्तु पुरुष की पूजा की जाती है। वास्तु देव की पूजा करने से उनके शरीर पर निवास करने वाले सभी 45 देवी-देवताओं की पूजा अपने आप हो जाती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। हर हर महादेव❤❤ 🙏🙏🌹🌹🙏

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