
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
227 days ago
क्षान्तिश्चेत्कवचेन किं किमरिभिःक्रोधोऽस्ति चेद्देहिनां, ज्ञातिश्चेदनलेन किं यदि सुहृद् दिव्यौषधेः किं फलम् किं सर्पैर्यदि दुर्जनाः किमु धनै: विद्यानवद्या यदि, व्रीडा चेत्किमु भूषणैः सुकविता यद्यस्ति राज्येन किम्॥ ----- नीतिशतक - २१ अर्थात् :--- यदि मनुष्य के पास क्षमा है तो कवच की क्या आवश्यकता? यदि क्रोध है तो शत्रुओं की क्या आवश्यकता ? यदि स्वजातीय हैं तो अग्नि की क्या आवश्यकता ? यदि मित्र हैं तो औषधियों की क्या आवश्यकता ? यदि दुर्जन हैं तो सर्पों की क्या आवश्यकता ? यदि निर्दोष विद्या है तो धन की क्या आवश्यकता ? यदि लज्जा है तो आभूषण की क्या आवश्यकता ? यदि काव्य-शक्ति है तो राज्य की क्या आवश्यकता ? 🌼🌹 जय सिया राम 🌹🌼

Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Jan 15, 2026
जय सीया राम जी! 🙏🕊️ संध्या नंदन जी! 🌅🙏 आपको शाम की राम राम! 🌟💖 भगवान राम की कृपा और आशीर्वाद आप पर सदा बना रहे। 🌟💫 जय श्री राम् जी 🙏 शुभकामनाएं! 🌟💖🙏🕊️

R k jangid phulera Jaipur
Jan 15, 2026
जय सियाराम जी शुभ संध्या वंदन 🙏
