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भगवान शनि देव की स्तुति और आराधना के लिए कई मंत्र और स्रोत प्रचलित हैं। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं। यहाँ शनि देव की सबसे लोकप्रिय स्तुति और मंत्र दिए गए हैं: 1. शनि देव का मूल मंत्र सबसे पहले इस मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है: > "ॐ शं शनैश्चराय नमः" > 2. शनि स्तुति (निलांजन समाभासं) यह श्लोक शनि देव की महिमा का वर्णन करता है और उनकी कृपा पाने के लिए सबसे सरल माध्यम है: निलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥ अर्थ: जो नीले पर्वत (इंद्रनील मणि) के समान कांति वाले हैं, सूर्य के पुत्र हैं, और यमराज के बड़े भाई हैं। जिनका जन्म सूर्य की पत्नी छाया के गर्भ से हुआ है, उन मन्दगामी शनि देव को मैं प्रणाम करता हूँ। 3. शनि देव के 10 विशेष नाम कष्टों के निवारण के लिए इन दस नामों का स्मरण करना बहुत शुभ होता है: * कोणस्थ * पिंगल * बभ्रु * कृष्ण * रौद्रान्तक * यमसौर * सौरि * शनैश्चर * मंद * पिप्पलाद 4. शनि देव की प्रार्थना के लाभ * न्याय और अनुशासन: शनि देव की स्तुति से जीवन में अनुशासन आता है। * कष्टों से मुक्ति: साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान मानसिक और शारीरिक कष्टों में शांति मिलती है। * कर्मों का फल: वे भक्तों को उनके अच्छे कर्मों का उत्तम फल प्रदान करते हैं। कुछ विशेष सुझाव: * शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। * शनि देव की पूजा करते समय उनकी आँखों में सीधे न देखकर उनके चरणों के दर्शन करने चाहिए।

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