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SHREE SHARMA

450 days ago

जथा लाभ संतोष सुख, रघुवर चरन सनेह तुलसी जो मन खूँद सम, कानन बसहुँ कि गेह जो कुछ मिल जाए उसी में जिनका मन संतुष्ट और सुखी रहता है और जिसमें श्री रघुनाथ जी के चरणों का प्रेम भरा है, जिनका मन ऐसा खूद-सा बन गया है, तुलसी कहते हैं कि वे वन में रहें या घर में, उनके लिए दोनों एक-से हैं... जय सियाराम 🙏

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