
SHREE SHARMA
320 days ago
प्रेरक कथा,,,,,,,,,, पार्वती ने भगवान शंकर की प्राप्ति हेतु तपश्चर्या की । भगवान शंकर प्रकट हुए तथा दर्शन दिए । उन्होंने पार्वती से विवाह करना स्वीकार किया तथा वे अदृश्य हो गए । इतने में कुछ अंतर पर तालाब में मगरमच्छ ने एक लडके को पकड लिया । लडके के चिल्लाने की स्वर सुनाई दिए । पार्वतीने ध्यान से सुना, तो वह लडका अत्यंत दयनीय स्थिति में चिल्ला रहा था, ‘‘ बचाओ, बचाओ, मेरा कोई नहीं है !’’ लडका चिल्ला रहा है, ऊंचे स्वर में रो रहा है । पार्वती का हृदय द्रवित हो गया । वह वहां पहुंच गई । उसने देखा, ‘एक सुंदर एवं सुकुमार लडके का पांव मगरमच्छ ने पकडा है तथा वह उसे घसीटकर ले जा रहा है ।’ लडका रोते हुए चिल्लाता है, ‘‘मेरा इस संसार में कोई नहीं । मेरी न तो मां है, न बाप, न ही कोई मित्र है, मेरा कोई नहीं । मुझे बचाओ !’’ पार्वती ने कहा, ‘‘हे ग्राह ! हे मगरमच्छ देवता ! इस लडके को छोड दो ।’’ मगरमच्छ ने कहा “दिन के छठे पहर में जो मुझे मिलता है, उसे अपना आहार समझकर स्वीकार करना, मेरा नियम है । ब्रह्मदेव ने दिन के छठे पहर में इस लडके को मेरे पास भेजा है । मैं इसे क्यों छोडूं ?” पार्वती ने कहा “हे मगर, तुम इसे छोड दो । इसके स्थान पर तुम्हें जो चाहिए वह मांग लो |” मगरमच्छ ने कहा, “तुमने जो तप करके भगवान शंकर को प्रसन्न किया तथा वरदान मांगा, यदि उस तप का फल मुझे दोगी, तो ही मैं इस लडके को छोड सकता हूं अन्यथा नहीं |” पार्वती माता ने कहा, “क्या बात कर रहे हो ! केवल इस जन्म का नहीं, अनेक जन्मों की तपश्चर्या का फल तुम्हें अर्पण करने हेतु सिद्ध हूं, किंतु इस लडके को छोड दो |” मगरमच्छ ने कहा, “सोच लो, उतावलेपन में आकर संकल्प मत करो |” पार्वती माता ने कहा, “मैंने सोच लिया है |” मगरमच्छ ने पार्वती से तपदान करने का संकल्प करवाया । तपश्चर्या का दान होते ही मगरमच्छ का देह तेज से चमकने लगा । उसने लडके को छोड दिया तथा बोला, ‘‘हे पार्वती, तुम्हारी तपश्चर्या के प्रभाव से मेरा देह कितना सुंदर बन गया है, मैं तेजस्वी बन गया हूं | अपने जीवनभर की पूंजी तुमने एक छोटे बच्चे को बचाने हेतु अर्पण की !’’ पार्वती माता ने उत्तर दिया, ‘‘ग्राह ! तप तो मैं पुन: कर सकती हूं; किंतु यदि तुम इस लडके को निगल जाते तो क्या ऐसा निर्दोष लडका वापस मिल जाता ?’’ देखते ही देखते वह लडका अदृश्य हो गया । मगर भी अदृश्य हो गया । पार्वती ने विचार किया, ‘मैंने मेरे तप का दान किया है । अब पुन: तप करती हूं । ’ पार्वती तप करने बैठी । थोडा ध्यान किया तो भगवान सदाशिव पुनः प्रकट होकर बोले, ‘‘पार्वती, भला अब क्यों तप कर रही हो ?’’ पार्वती ने कहा, ‘‘प्रभु ! मैंने तपश्चर्या का दान किया है । ’’ भगवान शंकरने कहा, ‘‘पार्वती, मगरमच्छ के रूप में मैं ही था तथा लडके के रूप मे भी मैं ही था । तुम्हारा चित्त प्राणिमात्र में आत्मीयता का अनुभव करता है या नहीं, इसकी परीक्षा लेने हेतु मैंने यह लीला रचाई । अनेक रूपों में दिखनेवाला मैं एक ही एक हूं । मैं अनेक शरीरों में, शरीरों से भिन्न शाश्वत आत्मा भी मैं ही हूं । प्राणिमात्र में तुम्हारा आत्मीयता का भाव धन्य है, मैं तुम्हारी इस प्रवृत्ति से प्रसन्न हूं ।’’ जय भोलेनाथ विशेष,,,,, हर प्राणी में जीवात्मा के रूप में ईश्वर विध्यमान है ! किसी भी जीव को दुखी करना अथवा मांसाहार इत्यादि ईश्वर की अवमानना है ! पशुओं अथवा पक्षियों को मार का खाने से जीवात्माओं का "श्राप " लगता है इस श्राप के ताप से आपको ८४ लाख योनियों (भुक्त योनि ) में दुखमय जीवन जीना पड़ता है ! अतः "अहिंसा परमो धर्म " के सिद्धांत में विश्वास करो एवं वैसा ही आचरण करो ! अहिंसा सबसे बड़े धर्म ( सत्य ,अहिंसा ,त्याग एवं दया ) में से एक स्तम्भ है जो हमारे जीवन को सुखमय बनाता है और ईश्वर का सानिध्य प्राप्त करने में सहायक है ! हमेशा याद रखिये "दया" से ही धर्म की उत्पत्ति होती है ! तभी तुलसीदास जी ने कहा था " दया धर्म का मूल है , पाप मूल अभिमान ! तुलसी दया ना छोड़िये ,जब तक घट में प्राण " अतः मांसाहार को त्यागिये !

Comments (5)

Saumya Sharma
Oct 16, 2025
जय श्री लक्ष्मीनारायण जी 🙏🌹☺️ आपको अक्टूबर माह के तीसरे बृहस्पतिवार की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🌹☺️ ठाकुर जी की कृपा से आप सपरिवार सदैव स्वस्थ और खुशहाल रहें 🙏🌹☺️ मां लक्ष्मी जी आपको धन धान्य के भंडार प्रदान करें 🙏 🌹☺️इसी शुभकामना के साथ सुप्रभात वंदन भाई जी 🙏🌹☺️

Rama Devi Sahu
Oct 16, 2025
🙏🥀 Om Namah Shivay 🥀🙏

Balraj Sethi Balraj Sethi
Oct 15, 2025
Om Namo Shivay Har Har Mahadev Jai Shiv Shanker Bhole Nath Ji Jai Parvati Mata Ji Ko Parnam

Pannalal Chouhan
Oct 15, 2025
जय जय श्री गणेश गजानंद जी
