
Rama Devi Sahu
233 days ago
हरे कृष्णा 🙌🏻🙌🏻 एक"चींटी" जब "पुष्प"का संग करती है, तो वह "भगवान"के श्री चरणों तक जा पहुँचती है और भगवान को चढ़ने वाला "प्रसाद" वह "सहजता"से ग्रहण कर लेती है,परन्तु जब वही चींटी "आग लगी हुई लकड़ी" का संग करती है तो वह जलकर भस्म हो जाती है। मिट्टी में मिलकर खाक हो जाती है"चींटी" तो वही है पर फर्क केवल संगत का है। हम भी वहीं है, बस किसी को संगत निहाल कर जाती है तो किसी को बर्बाद.. जिंदगी में और किसी बात का ध्यान रख पाए अथवा नहीं परन्तु "अपनी उठ बैठ" का ध्यान बहुत विशेष तौर पर रखना चाहिए, क्योंकि ये बना बनाया "खेल बिगाड़" भी देती है और "बिगडा़ हुआ खेल" बना भी देती है। मूरखों की संगत करने से ज्ञान का विनाश तथा क्रोध मे बढ़ोत्तरी होती है। हरि से विमुख होने पर गलत व्यक्तियों के प्रभाव मे जीवन चला जाता है और फिर पाप का पलडा़ भारी होने लगता है इसलिये पाप को यदि घटाना है तो निरंतर हरि के गुण गाते रहो। सब प्रकार के भोग भोगते रहने से तेज घटता है , भोगी समाप्त हो जायेगा पर भोग नहीं। यदि हम किसी से लगातार कुछ माँगते रहते है तो फिर निश्चित मानकर चलना कि वहाँ से प्रेम विलुप्त हो जायेगा। यदि हमारा चित्त भ्रमित है तो फिर ध्यान घट जाएगा। परिवार जनों की संगति से मोह में बढ़ोतरी होती है। सज्जनों की संगति से विचार, बुद्धि और विवेक मैं बढ़ोतरी होती है। गुणवान लोगों की संगति से ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। हरि गुणगान, हरि सेवा और हरी सत्संग से समस्त प्रकार की चिंता, विषाद और व्याधि से मुक्ति मिलती है। जिंदगी में जिसने हरि गुण गया उसने सबकुछ पाया। 🙏🏻!!जय श्री राधा कृष्ण !!🙏🏻





Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jan 9, 2026
🌹🌹 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Dopahar Jii 🌹🌹

