
SHREE SHARMA
266 days ago
देवाधिदेव महादेव की सुंदरता ,,,,,,, ( सुंदरता ==कुछ संत महात्माओं का मानना है कि कर्पूरगौरं शंकर तो प्रभु श्रीराम से भी सुंदर हैं परन्तु वह अपना निज स्वरूप कभी प्रकट नहीं करते क्योंकि इससे उनके आराध्य श्रीरामजी की सुंदरता के यश की प्रशंसा में कमी होगी !!) एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा, ,,,,,, पिताजी ! आप यह चिताभस्म लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते, मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में ! पिताजी आप एक बार कृपा करके अपने सुंदर रूप में माता के सम्मुख आएं, जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें ! भगवान शिवजी ने गणेशजी की बात मान ली ! कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं थी , बिखरी जटाएं सँवरी हुई, मुण्डमाला उतरी हुई थी ! सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते रह गये, वो ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी फीका पड़ जाये ! भगवान शिव ने अपना यह रूप कभी प्रकट नहीं किया था ! शिवजी का ऐसा अतुलनीय रूप कि करोड़ों कामदेव को भी मलिन कर रहा था ! गणेशजी अपने पिता की इस मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और मस्तक झुकाकर बोले - मुझे क्षमा करें पिताजी, परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए ! भगवान शिव ने पूछा - क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी, अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों ? गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा - क्षमा करें पिताश्री मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता ! और शिवजी मुस्कुराते हुए अपने पुराने स्वरूप में लौट आये ! कई संत महात्माओं ने अपने अनुभव से कहा है कि कर्पूरगौरं शंकर तो भगवान श्रीराम से भी सुंदर हैं परन्तु वह अपना निज स्वरूप कभी प्रकट नहीं करते क्योंकि इससे उनके प्रियतम आराध्य श्रीरामजी की सुंदरता के यश की प्रशंसा में कमी होगी !! 🌹🍀🌹🍀🌹🍀🌹🍀🌹🍀🌹🍀🌹🍀🌹 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 ६ 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 धर्मशील व्यक्ति ,,,,,,, जिमि सरिता सागर महँ जाहीं l जद्यपि ताहि कामना नाहीं ll तिमि सुख सम्पति बिनहिं बुलाये l धर्मशील पहँ जाइ सुहाये ll जैसे सरिता (नदी ) उबड-खाबड़, पथरीले स्थानों को पार करते हुए पूर्ण रूपेण निष्काम भाव से समुद्र में जा मिलती है, उसी प्रकार धर्म-रथ पर आसीन मनुष्य के पास उसके न चाहते हुए भी समस्त सुख-सम्पत्ति, रिद्धियाँ-सिद्धियाँ स्वत: आ जाती हैं, सत्य तो यह है कि वे उसकी दासिता ग्रहण करने के लिए लालायित रहती है ल ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ। याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥2॥ श्रद्धा और विश्वास के स्वरूप माता पार्वती जी और श्री शंकर जी की मैं वंदना करता हूँ, ""**जिनके बिना सिद्धजन अपने अन्तःकरण में स्थित ईश्वर को नहीं देख पाते॥2॥""** वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्। यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥3॥ अर्थात = ज्ञानमय, नित्य, शंकर रूपी गुरु की मैं वन्दना करता हूँ, जिनके आश्रित होने से ही टेढ़ा चन्द्रमा भी सर्वत्र वन्दित होता है॥3॥ सर्वदेवमयी यज्ञेश्वरी गौमाता को नमन 🙏👏🌹🌲🌿🌹 " जीवन का सत्य आत्मिक कल्याण है ना की भौतिक सुख !" "एक माटी का दिया सारी रात अंधियारे से लड़ता है, तू तो प्रभु का दिया है फिर किस बात से डरता है..." हे मानव तू उठ और सागर (प्रभु ) में विलीन होने के लिए पुरुषार्थ कर *आत्मा भी अंदर है* *परमात्मा भी अंदर है* *आत्मा के परमात्मा**से मिलने का रास्ता* *भी अंदर ही है ..* _*"खुद"को "खुद" के अंदर ही बोध करो...*_ _*अपने कर्माें पर भी कभी तो शोध करो...*_ 🌹🌹🌹🌹 शरीर परमात्मा का दिया हुआ उपहार है ! चाहो तो इससे " विभूतिया " (अच्छाइयां / पुण्य इत्यादि ) अर्जित करलो चाहे घोरतम " दुर्गति " ( बुराइया / पाप ) इत्यादि ! परोपकारी बनो एवं प्रभु का सानिध्य प्राप्त करो ! प्रभु हर जीव में चेतना रूप में विद्यमान है अतः प्राणियों से प्रेम करो ! शाकाहार अपनाओ , करुणा को चुनो ! जय गौमाता की 🙏👏🌹

Comments (1)

Rama Devi Sahu
Dec 7, 2025
🙏🔱 Har Har Mahadev 🔱🙏🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️
