
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
87 days ago
ॐ श्री हरि विष्णु नारायणा जी 🙏🏻 🚩 शुभ प्रभात जी 🙏🏻 🚩 सृष्टि का पूरा गणित है 🌌🪷* इसमें *भगवान विष्णु, ब्रह्मा जी और सौरमंडल* एक साथ हैं। हर डिटेल में गहरा अर्थ छुपा है 👇 --- *तस्वीर में क्या दिख रहा है?* *1. नीचे शेषनाग पर लेटे हैं - भगवान विष्णु* नीले रंग, योगनिद्रा में। *क्षीरसागर* में *शेषनाग* की शय्या पर विश्राम कर रहे हैं। *अर्थ:* सृष्टि के बीच भी जो *शांत, अचल, निर्लिप्त* रहे - वही विष्णु हैं। *पालनकर्ता* का यही स्वभाव है। *2. नाभि से निकला कमल और उस पर ब्रह्मा जी* विष्णु की नाभि से *सुवर्ण कमल* निकला है, उस पर *चतुर्मुख ब्रह्मा जी* विराजे हैं। *अर्थ:* *पालन से ही सृजन निकलता है*। ब्रह्मा जी के 4 मुख = 4 वेद, 4 दिशा, 4 युग। *3. ब्रह्मा जी के हाथ में कमंडल और जल की धारा* ब्रह्मा जी कमंडल से *जल बहा रहे हैं*, और वही जल *ग्रहों के चारों ओर घूम रहा है*। *अर्थ:* *सृष्टि का आधार जल है*। वही जल ग्रहों को जीवन देता है, गति देता है। *4. चारों ओर घूमते ग्रह* शनि, बृहस्पति, पृथ्वी, मंगल सब *ब्रह्मा जी के चारों ओर परिक्रमा* कर रहे हैं। *अर्थ:* ब्रह्मा जी *ब्रह्मांड के निर्माता* हैं। उनके संकल्प से ही *ग्रह, नक्षत्र, काल-चक्र* चलता है। --- *इस तस्वीर का 1 लाइन का संदेश* *"विष्णु पालते हैं, ब्रह्मा बनाते हैं, और तुम उसी सृष्टि का हिस्सा हो"* *कैसे?* - *विष्णु = तुम्हारा मन* - जो शांत रहे तो सारी दुनिया शांत - *ब्रह्मा = तुम्हारी सोच* - जो रचेगी, वही दुनिया बनेगी - *ग्रह = तुम्हारे कर्म* - जैसे कर्म करोगे, वैसे ही ग्रह घूमेंगे *सीधी बात* हम लोग *ग्रहों को पूजते हैं* ताकि ग्रह ठीक हों। पर ये तस्वीर कहती है: *"ग्रह नहीं, जिसने ग्रह बनाए उसे पकड़ो"*। जब *विष्णु-भक्ति* होगी, तो *ब्रह्मा की सृष्टि* अपने आप अनुकूल हो जाएगी। *|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ||* *|| ॐ वेदात्मने ब्रह्मणे नमः ||* *आज रात सोने से पहले 1 बार ये सोचो:* मैं भी किसी की सृष्टि का हिस्सा हूँ। *मैं क्या रच रहा हूँ?* 🌟 *जय श्री हरि 🙏*

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