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*अमृत कलश* 🪯संत कहते हैं यह दुनिया जैसी है वैसी ही रहेगी सतगुरु तो तुम्हारी वे सारी जड़ें काट देना चाहते हैं जो तुम्हें इस संसार की ओर वापस खींचती हैं ताकि तुम इस दु:खों से भरी दुनिया में कभी वापस न आओ सतगुरु का इस दुनिया में आने का यही मकसद है वे नामदान देकर इस संसार से मुक्ति दिलाते हैं!! 🪯 दूसरों की गलतियों पर तो हर कोई नजर रखता है, लेकिन अपने किए हुए गलतियों को देखने के लिए उसके पास कोई दर्पण नहीं होता। लाखो की गाड़ी एक चाबी और ब्रेक पर निर्भर है। करोड़ों का घर ताले और चाबी पर निर्भर है, इसी तरह हमारा व्यक्तित्व भी हमारी सोच और स्वभाव पर ही निर्भर है। मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारने के लिए दो ही बातें महत्वपूर्ण हैं। पहला अपने आप को तराशना एवं दूसरा अपने आप को तलाशना। तत्पश्चात् ही आपका व्यक्तित्व किसी किरदार को निभाने योग्य बनता है

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Pannalal Chouhan

Pannalal Chouhan

Dec 28, 2025

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय