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क्या आप जानते हैं कि हवन कुंड में आहुति डालते समय हम स्वाहा क्यों बोलते हैं? अगर आप यह एक शब्द ना बोले तो साक्षात त्रिदेव भी आपकी दी हुई आहुति नहीं खा सकते। आखिर कौन है यह देवी स्वाहा जिनके बिना पूरा का पूरा स्वर्ग भूख से तड़प कर मरने वाला था। यह ब्रह्मांड का वह समय था जब सृष्टि बस बनी ही थी। जरा कल्पना कीजिए। धरती पर हजारों आर्ष्य मुनि बैठे हैं। अग्नि की लपटें आसमान छू रही हैं। मंत्रों की गूंज से दिशाएं कांप रही हैं और हजारों किलो घी और अन्न आहुति दिया जा रहा है। लेकिन आसमान के ऊपर स्वर्ग में सन्नाटा पसरा था। देवराज इंद्र का मुकुट झुक गया था। देवताओं के चेहरों का चमकता हुआ तेज राख में बदल रहा था। धरती से दी जा रही करोड़ों आहुतियों में से एक निवाला भी देवताओं के होठों तक नहीं पहुंच रहा था। बिना अन्न और ऊर्जा के देवता तड़पने लगे। उनकी शक्तियां टूटने लगी और खूंखार असुरों ने स्वर्ग को घेरना शुरू कर दिया। ऐसा लगा जैसे देवताओं का अंत अब निश्चित है। भूख से कांपते और बिलखते हुए देवता दौड़े-दौड़े त्रिदेवों के पास पहुंचे। उनके आंसू छलक पड़े। प्रभु धरती पर आग जल रही है। इंसान अपना सब कुछ लुटा रहे हैं। पर हमारा पेट क्यों कट रहा है? तब त्रिदेवों ने एक ऐसा खौफनाक सच बताया जिसने देवताओं के पैरों तले जमीन खिसका दी। उन्होंने कहा, देवताओं, अग्नि के पास तुम्हारी आहुति को जलाने की ताकत तो है, लेकिन उसे तुम तक पहुंचाने का रास्ता नहीं है। अग्नि सिर्फ एक आग है, कोई डाकिया नहीं, अब एक ही रास्ता था। देवता रोते हुए 14 लोकों से भी ऊपर ब्रह्मांड के उस सर्वोच्च स्थान की ओर मुड़े गोलोक जहां स्वयं परम ब्रह्म श्री कृष्ण का वास है। भूखे प्यासे देवताओं ने आंसुओं से भीगी आंखों से उस आदि शक्ति की महा आराधना शुरू की। देवताओं की वो करुण चीख गोलोक तक पहुंची और तब गोलोक की उस असीम ऊर्जा से एक ऐसा प्रचंड विस्फोट हुआ कि स्वर्ग भी रोशन हो उठा। उस परम प्रकाश के बीच से एक अत्यंत तेजस्विनी और ममतामई देवी का जन्म हुआ। साक्षात देवी स्वाहा देवताओं की जान बचाने के लिए अग्निदेव और देवी स्वाहा का भव्य ब्रह्मांडीय विवाह हुआ। जब दोनों एक हुए तो गोलोक से परम ब्रह्म की एक ऐसी गूंज उठी जिसने ब्रह्मांड का संविधान लिख दिया। उद्घोष हुआ। आज से धरती पर जलने वाली कोई भी आग कोई भी हवन तब तक अधूरा है जब तक इंसान आहुति देते हुए स्वाहा नहीं पुकारेगा। स्वाहा कोई साधारण शब्द नहीं है। यह वह ममतामई मां है जो आग में जलते हुए उस अन्न को अपने आंचल में छिपाकर सीधे देवताओं के मुंह में निवाले की तरह डालती है। यह स्वर्ग का इकलौता पासवर्ड है। बिना इसके देवता आज भी भूखे रह जाएंगे। अगर देवी स्वाहा के इस त्याग और सनातन धर्म के इस अकल्पनीय रहस्य ने आपके दिल को छू लिया है। तो अपनी अगली आहुति से पहले कमेंट्स में पूरी श्रद्धा के साथ जय देवी स्वाहा जरूर लिखें।

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Comments (1)

Sudhir Kumar Sharma

Sudhir Kumar Sharma

May 27, 2026

जय मां देवी स्वाहा 🙏🙏🙏