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अयोध्या धाम की पावन धरा, **श्री हनुमानगढ़ी** से संकटमोचन हनुमान जी की मंगल आरती का स्मरण करना ही अत्यंत कल्याणकारी है। आज मंगलवार के इस विशेष अवसर पर प्रभु के दर्शन और सुमिरन के लिए कुछ विशेष पंक्तियाँ: ## **हनुमानगढ़ी की दिव्य स्तुति** हनुमानगढ़ी के महाराज, जिन्हें अयोध्या का अधिपति माना जाता है, उनके चरणों में यह वंदना: > **"अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।** > **सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥"** > ### **आज के दिन का विशेष महत्व** * **मंगलकारी मंगल:** आज मंगलवार का दिन है, जो श्री हनुमान जी की सेवा और भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। * **अयोध्या धाम का वैभव:** श्री रामलला के दर्शन से पूर्व हनुमानगढ़ी में बजरंगबली की आज्ञा लेना ही परंपरा है। आज की आरती का तेज भक्तों के जीवन के सभी अमंगल और बाधाओं को दूर करने वाला है। ### **प्रभु की आरती के भाव** हनुमानगढ़ी की दिव्य आरती में 'कपूर' और 'घी के दीपों' की जो आभा होती है, वह मन को असीम शांति और शक्ति प्रदान करती है। प्रभु का सिंदूरी स्वरूप और उनके हाथ में गदा, अधर्म के नाश और भक्तों की रक्षा का प्रतीक है। **मंगलवार की मंगलकामनाएं!** प्रभु श्री हनुमान जी महाराज आप पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें, आपको सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और अटूट 'संस्कार' प्रदान करें। **जय श्री राम! जय हनुमान!**

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