
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
11 hours ago
**पापंकुशा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं सभी को ** हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन (या कवार) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। आश्विन मास की इस एकादशी का सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है— **"पाप"** (यानी पाप) और **"अंकुश"** (यानी नियंत्रण या हाथी को वश में रखने वाला अंकुश)—यह एकादशी मनुष्य के समस्त पापों पर अंकुश लगाती (रोकती) है और उन्हें नष्ट करती है। इस व्रत की महिमा और कथा का वर्णन पद्म पुराण में विस्तार से मिलता है। आइए जानते हैं पापंकुशा एकादशी की महिमा, व्रत विधि और इसके फल के बारे में: ### **पापंकुशा एकादशी की महिमा एवं महत्व** * **समस्त पापों का नाश:** यह एकादशी जाने-अनजाने में किए गए ब्रह्महत्या जैसे महापापों को भी नष्ट करने में सक्षम मानी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को यमराज की यातनाएं नहीं भुगतनी पड़तीं। * **मोक्ष और स्वर्ग की प्राप्ति:** इस व्रत को करने वाले श्रद्धालु को मृत्यु के पश्चात भगवान विष्णु के परमधाम (वैकुंठ) की प्राप्ति होती है। * **तपस्या और यज्ञ का फल:** जो फल कठिन तपस्या, सहस्त्रों वाजपेयी और अश्वमेध यज्ञ करने से मिलता है, वही पुण्य फल केवल पापंकुशा एकादशी का व्रत रखने मात्र से प्राप्त हो जाता है। * **माता-पिता का उद्धार:** ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से साधु पुरुष अपनी पीढ़ी की कई पीढ़ियों (माता-पिता और पत्नी पक्ष के कुल) को भी पाप मुक्त करके बैकुंठ धाम पहुँचा देते हैं। * **धन, धान्य और आरोग्य:** भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को जीवन में सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। ### **व्रत और पूजन की विधि** 1. **दशमी तिथि से नियम:** एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि की रात्रि से ही शुरू हो जाते हैं, जिसमें भोजन सात्विक रूप से करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। 2. **स्नान और संकल्प:** एकादशी के दिन प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। 3. **भगवान विष्णु की पूजा:** घर के मंदिर में भगवान विष्णु (या श्री कृष्ण) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं। 4. **सामग्री अर्पण:** भगवान को पीले वस्त्र, पीले फूल, अक्षत (चावल - एकादशी पर वर्जित माना जाता है इसलिए पुष्प अर्पित करें), रोली, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य (ऋतुफल और मिठाई) अर्पित करें। 5. **कथा श्रवण:** पूजा के दौरान पापंकुशा एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें और भगवान विष्णु के मंत्र **"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"** का जाप करें। 6. **रात्रि जागरण:** इस दिन रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करना और जागरण करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। 7. **द्वादशी पारण:** एकादशी के अगले दिन (द्वादशी तिथि पर) ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान-दक्षिण देने के पश्चात अपनी सामर्थ्य के अनुसार सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें। > **विशेष नोट:** एकादशी के दिन चावल (अक्षत) खाना या उसका उपयोग पूजन में वर्जित माना जाता है। इस दिन क्रोध, झूठ और ईर्ष्या से दूर रहकर पूरी निष्ठा के साथ भगवान श्रीहरि का स्मरण करना चाहिए। >

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