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*🌹भगवान विष्णु को क्यों लेना पड़ा वराह अवतार? वराह जयंती के दिन जरूर पढ़ें यह कथा🌹* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *⭕13 सितंबर 2026 को वराह जयंती है, जो भगवान विष्णु के तीसरे अवतार को समर्पित है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, श्रीहरि विष्णु ने सृष्टि की रक्षा करने और दुष्टों का नाश करने के लिए कई अवतार लिए.* *भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से 10 सबसे प्रमुख माने जाते हैं और इन्हीं में से एक है वराह अवतार. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान विष्णु ने वराह रूप लेकर पृथ्वी को हिरण्याक्ष से मुक्त करवाया था. इसी कारण यह दिन वराह जयंती के रूप में मनाया जाता है. आइए पढ़ते हैं वराह जयंती की कथा.* *🪔वराह अवतार की कथा* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 धर्म शास्त्रों में वर्णित पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार सप्त ऋषि वैकुंठ लोक पहुंचे लेकिन वहां के द्वारपाल जय और विजय ने उन सप्त ऋषियों को द्वार पर रोक दिया, जिससे क्रोधित होकर उन्हें शाप मिला कि दोनों को तीन जन्मों तक पृथ्वी पर दैत्य बनकर रहना पड़ेगा. पहले जन्म में दोनों ने कश्यप और दिति के पुत्रों के रूप में जन्म लिया और उनका नाम पड़ा हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष. दोनों ने पृथ्वी वासियों को परेशान करना शुरू कर दिया. दिन-ब-दिन दोनों का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ता जा रहा था. हिरण्याक्ष ने यज्ञ आदि कर्म करने पर भी लोगों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था. *🪔ऐसे हुई वराह भगवान की उत्पत्ति* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 एक दिन हिरण्याक्ष घूमते हुए वरुण देव की नगरी में जा पहुंचा. पाताल लोक में जाकर हिरण्याक्ष, वरुण देव को युद्ध के लिए ललकारने लगा. तब वरुण देव बोले कि मैं तुम जैसे बलशाली वीर से लड़ने के योग्य नहीं हूं, इसलिए मैं तुमसे नहीं लड़ सकता. तुम्हें विष्णु जी से युद्ध करना चाहिए. तब सभी देवताओं ने ब्रह्माजी और विष्णुजी से हिरण्याक्ष से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की. यह सुनकर ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अपनी नासिका से वराह नारायण को जन्म दिया. इस तरह भगवान विष्णु के वराह अवतार का जन्म हुआ. *🪔भगवान वराह अवतार ने हिरण्याक्ष का अंत* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 वरुण देव की बात सुनकर हिरण्याक्ष ने देवर्षि नारद से विष्णु जी का पता पूछा. देवर्षि नारद ने उन्हें बताया कि भगवान विष्णु इस समय वराह का रूप धारण करके पृथ्वी को समुद्र से निकालने गए हुए हैं. यह सुनकर हिरण्याक्ष तुरंत उसी जगह पहुंच, क्योंकि उसने ही पृथ्वी को समुद्र में छिपा रखा था. वहां पहुंचने पर हिरण्याक्ष ने देखा कि भगवान विष्णु वराह अवतार में पृथ्वी को समुद्र से बाहर ले जा रहे हैं. इसके बाद हिरण्याक्ष और भगवान वराह में महायुद्ध शुरू हो गया. भगवान विष्णु ने अपने दांतों और जबड़े से हिरण्याक्ष का पेट फाड़ दिया और पृथ्वी को फिर से अपने स्थान पर स्थापित कर दिया. *🚩#हरिऊँ🚩* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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