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19.2.2026 *"इस संसार में किसी को भी ठीक से न्याय नहीं मिलता।"* जब कोई व्यक्ति अच्छा काम करता है, समाज में उसकी प्रतिष्ठा अच्छी चल रही होती है, तो लोग अपने स्वार्थ के कारण उसके दोषों पर ध्यान नहीं देते। *"बल्कि उसके दोषों को भी गुण के रूप में स्वीकार कर लेते हैं। जैसे आजकल के बड़े धनवान लोग चरित्रहीनता करते हैं, सिगरेट पीते हैं, शराब पीते हैं, तो समाज के सामान्य लोग उनके इन दोषों का कोई खंडन विरोध आदि नहीं करते। बल्कि उन्हें बड़ा व्यक्ति मानकर उनके दोषों को स्वीकार कर लेते हैं।"* इसके विपरीत यदि किसी व्यक्ति के पास धन आदि न हो, समाज में कोई विशेष प्रतिष्ठा न हो, तो उसके बहुत पुरुषार्थ करने पर भी समाज के लोग उसको सम्मान नहीं देते। *"क्योंकि उन्हें लगता है कि इस व्यक्ति से हमें क्या स्वार्थ सिद्धि हो पाएगी? कुछ नहीं। तो हम इसको क्यों सम्मान देवें आदि आदि।"* इस प्रकार से पक्षपात होने के कारण समाज में लोगों को न्याय नहीं मिलता। *"परंतु यह जो कुछ संसार में अन्याय और पक्षपात हो रहा है, यह ठीक नहीं है।" लोग अपने स्वार्थ के कारण ऐसा करते हैं। लोग यह नहीं जानते, कि "हम जो इस प्रकार का अन्याय करते हैं, इसके बदले में ईश्वर हमें दंड देगा। ईश्वर का दंड नहीं समझते। इसीलिए लोग ऐसी गलतियां करते हैं।"* यदि आप में इतनी बौद्धिक क्षमता हो और आप इस बात को समझ सकते हों, कि यह अन्याय है। अन्याय का साथ नहीं देना चाहिए। *"तो कम से कम आप अपनी रक्षा अवश्य करें। आप अन्यायकारी समाज की नकल न करें। ईश्वर की न्याय व्यवस्था को सबसे ऊपर मानकर सबके साथ ठीक-ठीक न्यायपूर्ण व्यवहार करें। तभी आप ईश्वर के दंड से बच पाएंगे और आपका भविष्य उत्तम बनेगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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