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॥श्री हनुमते नम:॥ अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं। दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्॥ सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं। रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ भावार्थ:- अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत के समान शरीर वाले, दैत्य रूपी वन के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान्‌जी को मैं प्रणाम करता हूँ| 🌷 आज का सुविचार 🌷 "शक्ति शारीरिक क्षमता से नहीं आती, बल्कि एक अडिग इच्छाशक्ति से पैदा होती है।" जिस प्रकार हनुमान जी ने अपनी अटूट भक्ति और इच्छाशक्ति से असंभव कार्यों को संभव किया, उसी प्रकार सही दिशा में दृढ़ संकल्प रखने वाला व्यक्ति हर बाधा को पार कर सकता है। आपका दिन मंगलमय और ऊर्जा से भरा हो! ‼️जय श्री राम‼️ ‼️जय पवनपुत्र हनुमान‼️

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Comments (2)

Rohit  Patel

Rohit Patel

Apr 7, 2026

जय जय श्री राम 🪷📿🙏💕💞💕💞