
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
3 days ago
यहाँ संपूर्ण **पितृ चालीसा** पाठ दिया गया है: ### **दोहा** बन्दौं पितृ चरण कमल, करूँ हृदय उज्यार। कृपा करहु पितृ देव मम, भवसागर से तार॥ ### **चौपाई** जय जय पितृ देव भगवंता, तुम हो कुल के आदि अनंता। अमृत रूप सुधा के दाता, दुःखहारी सब जग के ज्ञाता॥ सूर्य लोक में वास तुम्हारा, तुम भक्तों का एक सहारा। अमावस्या तिथि अति मनभावन, आते गृह करने सुख पावन॥ जो नर श्रद्धा भाव लगावै, पिंड दान विधिपूर्वक पावै। तर्पण कर जल जो कोई दीजै, त Eहिृ तृप्त परम सुख कीजै॥ गोदान और अन्न जो देवै, ब्राह्मण को भोजन जो सेवै। पितृ ऋण से मुक्त हो जावै, वंश सहित आशीष पावै॥ जो कोई करे पितृ अपमान, कुल का होता नाश महान। पितृ दोष से जो घबरावै, सुत-धन-गेह सुख नहिं पावै॥ प्रति वर्ष जो श्राद्ध करावै, कुटुंब सहित सुख-संपत पावै। गरुड़ पुराण में महिमा गाई, पितृ कृपा बिन मुक्ति नाहीं॥ अमावस्या और पूर्णिमा भाई, पितृ स्मरण की रुत है आई। काले तिल जल दूर्वा लावै, मनवांछित फल नर ले जावै॥ जो यह चालीसा नित गावै, पितृ कृपा जीवन सुख पावै। अष्ट सिधि नौ निधि के दाता, पितृ देव हैं भाग्य विधाता॥ ### **दोहा** पुत्र-पौत्र संपति विपुल, देहु आशीष अपार। चरण किसलय पर नमन, क्षमहु अपराध हमार॥
Comments (2)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Oct 3, 2026
ॐ पितृ देवाय नमः शुभ रात्रि जी 🙏

Pannalal panchal पंजी पांचाल लोहार ब्यावर राजस्थान
Oct 3, 2026
पितृ देवोभ्य नमः
