
SHREE SHARMA
73 days ago
. “अपना मन साफ करें” जाड़े का मौसम है, दर्जी दालान की धूप में बैठा कपड़े-सी रहा है। घर के अन्दर से लड़के ने आकर कहा-'बाबा ! जाड़ा लगता है, एक मिरजई तो सी दो।' दर्जी ने कहा-'बेटा ! अभी तो धूप निकली है। थोड़ा गरमा ले-आज फुरसत मिली तो सी दूँगा।' लड़का कुछ देर वहाँ बैठा, फिर उसने कहा-'बाबा ! आज जरूर सी देना।' दर्जी दो नये ग्राहकों से बात कर रहा था, उसने कुछ उत्तर नहीं दिया, लड़का घर के अन्दर चला गया। दूसरे दिन सबेरे ही लड़के की माँ ने कहा-'रामू के बाबा ! लड़का कितने दिनों से जाड़े में मरता और रोता है। तुम्हें इसके लिये एक मिरजई सी देने तक की फुरसत नहीं मिली। मुझे कपड़ा ला दो तो मैं ही सी हूँ। दर्जी ने कहा-'तू कहती है सो तो ठीक है, पर बता, मैं कब सीऊँ ? जाड़ा शुरू हुआ है, ग्राहक दिन-रात तकाजा करते हैं, मुझे तो उनके कपड़े सीने में ही फुरसत नहीं मिलती। देखती नहीं, मैं खुद दिन-रात नंगे बदन रहता हूँ। क्या मुझे सर्दी नहीं लगती ? फुरसत मिले तब न बाजार जाकर कपड़ा लाऊँ।' ‘कपड़ा किसी से मँगवा लो, इतने ग्राहक आते हैं उनमें से किसी से कह दो, ला देगा' रामू की माँ ने ऐसा कहा। दर्जी बोला-'कोई कपड़ा ला देगा तब भी क्या होगा ? अभी मेरे पास ग्राहकों के इतने कपड़े सीने पड़े हैं कि तुम और मैं दोनों लगातार कई दिनों तक बैठेंगे तब कहीं काम सपरेगा। बीच में और काम आ गया तो वह भी नहीं। दर्जिन बोली-'तुम्हारा काम तो पूरा होने का नहीं, दूसरों के कपड़े सीते-सीते जाड़ा निकल जायगा, भगवान् न करे कहीं जाड़े से लड़के को या तुमको जडैया-बुखार हो गयी तो बड़ी मुसीबत होगी, फिर मेरी क्या गति होगी ?' दर्जी ने रुखाई से कहा, 'क्या किया जाय अभी तो फुरसत नहीं है।' जगत् में यही हाल परोपदेशकों का है, उन्हें परोपदेश में ही फुरसत नहीं मिलती। (दर्जी दूसरों के कपड़े तो सीता है परन्तु ये तो प्रायः अपना सारा वक्त यों ही बरबाद करते हैं।) परन्तु एक दिन ऐसी फुरसत मिलेगी कि फिर कोई भी रुकावट काम नहीं आवेगी। इन बेचारों की तो बात ही कौन-सी है ? नो टाइम का बोर्ड लटका कर रखने वाले और क्यों करें मरने की भी फुरसत नहीं मिलती। रटने वाले, सब को उसी श्मशान की धूल में जाकर लोटने के लिये पूरी फुरसत आप ही मिल जायगी। इसलिये पहले से ही फुरसत निकाल लो तो बुद्धिमानी है। फुरसत कहीं से बुलायी नहीं जाती; निकालनी पड़ती है। कोरे रह जाओगे तो बड़ी मुसीबत होगी। दूसरे का उद्धार करने के काम से जरा फुरसत निकालकर, देश सेवा से जरा समय बचाकर पहले अपना उद्धार और अपनी सेवा करो, पहले अपने पापों को धो लो तभी देश सेवा के और विश्व सेवा के लायक बनोगे। सावधान ! ~~~०~~~ - श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार (श्रीभाईजी) 'सरस प्रसंग' ० ० ० ॥जय जय श्री राधे॥

Comments (6)

बरखा शर्मा
Jun 18, 2026
🌹🌹RADHE RADHE JI 🌹SHUBH RATRI JI🌹🌹

Umesh Sharma 🌹Radhe Radhe🌹
Jun 18, 2026
💖Radhe Radhe💖shubh ratri🌹🌿🌹🌿

Riya Riya 💖💖
Jun 18, 2026
🌹🌺🌼जय श्री राधे कृष्ण जी 🌼🌺🌹🙏

Rama Devi Sahu
Jun 18, 2026
🙏‼️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna ‼️🙏

R k jangid phulera Jaipur
Jun 18, 2026
जय श्री राधे कृष्णा 🌹🙏

Shah 🩷
Jun 18, 2026
*🪷 जय श्री राधे कृष्ण 🪷*
