
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
122 days ago
30.4.2026 संसार में देखने में ऐसा आता है कि आजकल बुरे लोग अधिक मिलते हैं, और अच्छे लोग कम मिलते हैं। *"अच्छे लोगों को ढूंढना बहुत कठिन होता है।"* जन्म-जन्मांतरों के संस्कारों के कारण व्यक्ति बुराई की ओर जल्दी आकर्षित होता है, और अच्छाई की ओर बढ़ने में बहुत परिश्रम करना पड़ता है। *"व्यक्ति परिश्रम करना नहीं चाहता ऐसी मनोवृत्ति अधिकतर देखी जाती है। इसलिए अच्छे लोग कम मिल पाते हैं।"* फिर कभी कभी जीवन में ऐसी परिस्थितियां भी आ जाती हैं,कि किसी को नौकरी के कारण से अथवा अन्य किसी कारण से स्थान बदलना पड़ता है। एक नगर छोड़कर दूसरे नगर में जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में वे अच्छे लोग छूट जाते हैं। *"उन्हें छोड़ना बहुत कठिन लगता है।"* फिर दूरी होने के कारण उनसे अधिकतर मिलना जुलना नहीं हो पाता। अब तो फोन की सुविधा हो गई है। इसलिए लोग फोन पर बातचीत कर लेते हैं, और जैसे-तैसे अपना टाइम पास कर लेते हैं। *"परंतु अच्छे लोगों की याद बहुत सताती है। संसार के लोग, अच्छे लोगों से दूर रहते हुए भी उन्हें भूल नहीं पाते।"* इसलिए यह कहावत बनी है, कि *"अच्छे लोगों को भूल पाना तो असंभव है।"* आप भी शायद अच्छे लोगों में से होंगे। *"हो सकता है, आपको भी लोग इसी प्रकार से पसंद करते होंगे। कुछ लोग आपके साथ में भी रहते होंगे। और कुछ दूर भी होंगे। वे दूर वाले लोग भी आपको भूल नहीं पाते होंगे। और जब-जब अवसर मिलता होगा, तब तब वे आपसे बातचीत भी अवश्य ही करते होंगे।"* यदि आप भी ऐसे ही हैं, तो आप बहुत सौभाग्यशाली हैं। *"और यदि आप में कुछ कमी हो, तो आप भी ऐसे ही अच्छे व्यक्ति बनने का प्रयत्न करें। जिससे कि लोग आपको सदा याद करें, और आपके उत्तम गुणों से कुछ शिक्षा प्रेरणा भी प्राप्त करें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (1)

सविता
Apr 30, 2026
Radhe radhe 🙏🌹
