
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
188 days ago
भक्ति, शक्ति और विश्वास का संगम – आ गए शिव-पार्वती| यह पंक्तियाँ सुनते ही मन में एक अलौकिक शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है। शिव और शक्ति (पार्वती) का मिलन केवल दो देवताओं का मिलन नहीं, बल्कि पुरुष और प्रकृति का वह संतुलन है जिससे यह पूरी सृष्टि संचालित होती है। जहाँ भगवान शिव वैराग्य और शक्ति के प्रतीक हैं, वहीं माता पार्वती प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास की प्रतिमूर्ति हैं। शिव-पार्वती: एक आदर्श संगम * भक्ति: माँ पार्वती की वह कठोर तपस्या, जिसने स्वयं महादेव को भी पिघला दिया। यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में वह बल है जो ईश्वर को भी पा सकता है। * शक्ति: बिना शक्ति के 'शिव' भी 'शव' के समान माने जाते हैं। माता पार्वती शक्ति स्वरूप हैं, जो संसार को गति प्रदान करती हैं। * विश्वास: अर्धनारीश्वर रूप इस बात का प्रमाण है कि विश्वास और पूरकता ही किसी भी रिश्ते की नींव होती है। अर्धनारीश्वर: पूर्णता का प्रतीक जब हम शिव-पार्वती की बात करते हैं, तो हम उस संतुलन की बात करते हैं जहाँ: * ज्ञान और क्रिया एक साथ चलते हैं। * स्थिरता और गति का मेल होता है। * करुणा और न्याय का सामंजस्य बैठता है। > "कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। > सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥" > निश्चित ही, शिव और शक्ति के इस पावन स्वरूप पर कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत हैं जो उनके प्रेम, तप और सामंजस्य को दर्शाती हैं: शिव-शक्ति: आदि और अनंत शून्य से निकलकर जो अनंत हो गए, वैराग्य का चोला ओढ़कर जो संत हो गए। हिमालय की गोद में बैठी वो तपस्या निराली, जिनके विश्वास से महादेव भी वसंत हो गए। इस संगम की सुंदरता * शिव आधार हैं, तो पार्वती विस्तार: बिना आधार के विस्तार संभव नहीं, और बिना विस्तार के आधार का कोई अर्थ नहीं। * एक शांत हिमालय, एक बहती गंगा: जहाँ शिव स्थिरता का प्रतीक हैं, वहीं माता पार्वती जीवन की निरंतरता और ऊर्जा का। * हलाहल और अमृत: शिव ने विष पिया, पार्वती ने उसे कंठ में रोका; यह दर्शाता है कि विपदाओं को साथ मिलकर ही संभाला जा सकता है। एक छोटी सी कविता आपके लिए > भस्म रमाए बैठे योगी, गौरा रूप लुभाए, > डमरू की हर थाप पे देखो, मन मंदिर मुस्काए। > भक्ति का अर्पण है माता, शक्ति का संचय शिव, > कण-कण में जो व्याप्त खड़ा है, वो ही तो है जीव। > श्रद्धा की माँ पार्वती हैं, विश्वास रूपी महादेव, > इनके चरणों में जो झुका, बन गया वो ही देव। > हर-हर महादेव!
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