
Rama Devi Sahu
1 hours ago
इतिहास की सबसे पहली रखी - पाताल लोक से शुरू हुई थी रक्षाबंधन की परंपरा । पौराणिक मान्यता के अनुसार, रक्षाबंधन की शुरुआत की कथा माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु और राजा बलि से जुड़ी है। कहानी उस समय की है जब असुरराज महाबली ने अपने पराक्रम और दानशीलता के बल पर तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि से केवल तीन पग भूमि का दान मांगा। वामन देव ने अपने विराट स्वरूप से दो पग में पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग नाप लिया। तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा, तो राजा बलि ने अपना सिर प्रभु के चरणों में रख दिया। उनकी भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। लेकिन इसके बाद बलि ने भगवान विष्णु से ऐसा वरदान मांग लिया कि प्रभु सदैव उनके साथ रहें और पाताल लोक के द्वारपाल बनकर उनकी रक्षा करें। भगवान विष्णु ने अपना वचन निभाया और पाताल में रहने लगे। भगवान विष्णु के वापस न लौटने से माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं। भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम छोड़ने से माता लक्ष्मी अत्यंत दुखी रहने लगीं। तब उन्होंने प्रभु को वापस लाने की एक योजना बनाई। उस योजना के तहत माता लक्ष्मी एक साधारण स्त्री का रूप धारण करके पाताल लोक पहुंचीं। उन्होंने राजा बलि को अपना भाई माना और श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि की कलाई पर एक रक्षासूत्र बांध दिया। साथ ही उन्होंने राजा बलि के लंबे और सुखद जीवन की प्रार्थना की। यह देख राजा बलि का दिल स्नेह और करुणा से भर गया। जिसके बाद राजा बलि ने अपनी धर्म बहन से कुछ मांगने के लिए कहा। तब माता लक्ष्मी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुईं और बोलीं, 'हे राजन! मुझे धन-दौलत कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ मेरे स्वामी मुझे लौटा दो।' राजा बलि ने माता लक्ष्मी द्वारा बांधे गए पवित्र धागे का मान रखा और तुरंत भगवान विष्णु को अपने उस अनोखे वादे से मुक्त कर दिया, जिसके तहत उन्होंने भगवान को अपना द्वारपाल बना लिया था। इसके बाद माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को लेकर बैकुंठ धाम वापस आ गईं। कहते हैं इस घटना के बाद से ही राखी पर्व मनाया जाने लगा। 🙏🪷

Comments (2)

Rohit Patel
Aug 27, 2026
जी रमा जी 👌💕💕💕

