
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
190 days ago
ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥ अर्थ: इंद्रनील मणि के समान जिनकी आभा है, जो सूर्यपुत्र हैं और यमराज के बड़े भाई हैं। सूर्य की पत्नी छाया के गर्भ से उत्पन्न उन शनिदेव को मैं प्रणाम करता हूँ। शनि देव को समर्पित यह मंत्र अनुशासन, धैर्य और न्याय का प्रतीक माना जाता है। जीवन में स्थिरता और कर्मों के प्रति सचेत रहने के लिए यह एक अत्यंत प्रभावशाली विचार है। आज के लिए एक शुभ विचार (सुविचार): > "कर्म ही पूजा है और धैर्य ही शक्ति। समय का चक्र कठिन हो सकता है, लेकिन न्यायप्रिय और परिश्रमी व्यक्ति की विजय निश्चित होती है।" > शुभप्रभात जी 🙏🏻 आपका दिन मंगलमय हो!
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