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जय भोले नाथ जय हनुमानजी 🙏 वह भगवान शिव के 11 रुद्र अवतारों और विशेष रूप से हनुमान जी (ग्यारहवें रुद्र) की महिमा से जुड़ा एक बहुत ही सुंदर और दुर्लभ पौराणिक आख्यान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि पर जल का संकट गहराया और प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगा, तब इस संकट के निवारण के लिए यह घटनाक्रम घटित हुआ: एकादश रुद्र और जल संकट का निवारण * देवताओं की पुकार: जब पृथ्वी पर जल समाप्त होने लगा और समस्त जीव-जंतु त्राहि-त्राहि करने लगे, तब सभी देवता और ऋषि-मुनि भगवान शिव की शरण में गए। जल के बिना सृष्टि का अंत निश्चित था। * 11 रुद्रों का आह्वान: महादेव ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपने अंश से उत्पन्न 11 रुद्रों को प्रकट किया। इन रुद्रों के पास सृष्टि की विभिन्न ऊर्जाओं को नियंत्रित करने की शक्ति थी। * दश रुद्रों का मौन: होगये जब शिव जी ने इस संकट के समाधान का मार्ग पूछा, तब प्रथम 10 रुद्रों ने अपनी सीमाएं स्वीकार करते हुए सिर झुका लिया, क्योंकि वह समय अत्यंत कठिन और भीषण था। * ग्यारहवें रुद्र (हनुमान जी): अंत में, ग्यारहवें रुद्र अवतार ने आगे बढ़कर इस कार्य का बीड़ा उठाया। हनुमान जी को भगवान शिव का ही ग्यारहवां अवतार माना जाता है। उन्होंने अपनी असीम शक्ति और भक्ति के बल पर न केवल जल का संकट दूर किया, बल्कि पूरी सृष्टि को विनाश से बचा लिया। इस प्रसंग का महत्व यह कथा हमें सिखाती है कि जब कोई कार्य अत्यंत असंभव प्रतीत हो, तब सेवा, समर्पण और धैर्य (जो हनुमान जी के प्रतीक हैं) ही संकट से उबार सकते हैं। > एक रोचक जानकारी: इसी प्रकार की एक घटना 'मत्स्य पुराण' और 'स्कंद पुराण' में भी आती है जहाँ ऋषियों ने जल के संरक्षण के लिए शिव जी की आराधना की थी। >

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