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SHREE SHARMA

429 days ago

जय राम रमारमनं शमनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनं। अवधेस सुरेस रमेस बिभो। सरनागत मागत पाहि प्रभो॥ हे राम! हे रमारमण (रमाकांत)! हे जन्म-मरण के संताप का नाश करने वाले! आपकी जय हो, आवागमन के भय से व्याकुल इस सेवक की रक्षा कीजिए। हे अवधपति! हे देवताओं के स्वामी! हे रमापति! हे विभो! मैं शरणांगत आपसे यही मांगता हूं कि हे प्रभो! मेरी रक्षा कीजिए... जय सियाराम 🙏

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