
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
262 days ago
शून्य का सफर मैं अकेला नहीं हूँ, फिर भी मेरे शब्दों के लिए कोई कान नहीं। मौन रहकर भी मैं अपने शब्दों को पंख देता हूँ, पर उड़ान देखने वाला कोई नहीं। भीतर मेरे उमड़ी ज्वाला माँ के शीतल जल से शांत तो हो जाएगी, पर यह मलाल रहेगा कि समझने वाला और कोई नहीं। चेहरे पर मायूसी भरी मुस्कान— उसे समझने वाला कोई नहीं। समय चाहे किसी का कितना भी अच्छा हो, पर उसे संभालने वाला कोई नेक दिल नहीं। और चाहे भावना कितनी ही गहरी क्यों न हो, शरण देने वाला आजकल कोई नहीं। शायद ये तलाश ही, अब मेरी मंज़िल है, क्योंकि इस भीड़ में, अपना कोई साहिल नहीं। — अंकुश 🙏🏻 शुभप्रभात जी 🙏
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