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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जब देश के राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने केरल के तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) के एक सड़क किनारे जूते सीने वाले मोची (रैयत) और एक छोटे से ढाबे (होटल) के मालिक को अपने विशेष मेहमान (Presidential Guest) के रूप में आमंत्रित किया था। इसके पीछे उनकी सादगी, कृतज्ञता और मानवीय मूल्य मुख्य कारण थे: * **पुराना नाता और संघर्ष के दिन:** जब डॉ. कलाम तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) में एक वैज्ञानिक के रूप में शुरुआती संघर्ष के दौर में काम कर रहे थे, तब वे उस मोची से अपने जूते सिलवाते थे और अक्सर उसी छोटे से ढाबे पर खाना खाते थे। * **जमीनी रिश्तों और कृतज्ञता का सम्मान:** कलाम साहब सफलता की कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाएं, लेकिन वे अपने संघर्ष के दिनों को और उन साधारण लोगों को कभी नहीं भूले जिन्होंने उनके कठिन समय में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनका साथ दिया था। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे पद मिलने के बाद भी अपने पुराने और आम दोस्तों को नहीं भूले हैं। * **समानता और विनम्रता का संदेश:** देश के सर्वोच्च पद (राष्ट्रपति भवन/राजभवन) पर पहुँचने के बाद उन्होंने यह विशेष आमंत्रण देकर यह संदेश दिया कि समाज में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता। उन्होंने वीआईपी संस्कृति से ऊपर उठकर आम जनता और मेहनतकश वर्ग को वह सम्मान दिया, जिसके वे असल हकदार थे। यही वजह थी कि डॉ. कलाम को **"जनता के राष्ट्रपति" (People's President)** के रूप में याद किया जाता है, क्योंकि वे हमेशा सादगी और मानवता को सर्वोपरि रखते थे।

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