MyMandirInstall
Profile

SHREE SHARMA

188 days ago

ब्रह्मदेव का संशय भंग - जब भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया, तो वे वृंदावन में ग्वाल-बालों के साथ साधारण बालकों जैसी क्रीड़ाएं करते थे। वे जूठा भोजन भी खा लेते थे और बछड़ों के पीछे दौड़ते थे। ब्रह्मा जी को यह देखकर संशय हुआ कि क्या यह साधारण बालक वास्तव में वही परमब्रह्म है जो सृष्टि का स्वामी है? श्री कृष्ण की शक्ति की परीक्षा लेने के लिए ब्रह्मा जी ने एक योजना बनाई। एक बार जब कृष्ण और उनके सखा वन में भोजन कर रहे थे, तब ब्रह्मा जी ने अवसर पाकर कृष्ण के सभी बछड़ों और ग्वाल-बालों को चुरा लिया और उन्हें अपनी योगमाया से 'ब्रह्मलोक' की एक गुफा में सुला दिया। ब्रह्मा जी ने सोचा कि जब कृष्ण अपने साथियों को नहीं पाएंगे, तो वे व्याकुल हो जाएंगे और तब उनकी वास्तविकता प्रकट होगी। श्री कृष्ण सब कुछ जानते थे। उन्होंने ब्रह्मा जी के अहंकार को तोड़ने और ग्वाल-बालों की माताओं की ममता को तृप्त करने के लिए एक अद्भुत लीला रची। कृष्ण स्वयं ही अनंत रूपों में प्रकट हो गए। वे स्वयं ही हर एक ग्वाल-बाल बन गए और स्वयं ही हर एक बछड़ा बन गए। रंग, रूप, स्वभाव और वेशभूषा—सब कुछ हूबहू वैसा ही था। एक वर्ष तक वृंदावन में किसी को पता ही नहीं चला कि असली ग्वाल-बाल और बछड़े गायब हैं। वास्तव में, उस वर्ष वृंदावन में प्रेम और आनंद और अधिक बढ़ गया क्योंकि स्वयं साक्षात ब्रह्म हर घर में पुत्र और बछड़े के रूप में मौजूद थे। एक वर्ष बाद जब ब्रह्मा जी वापस यह देखने आए कि कृष्ण क्या कर रहे हैं, तो वे चकित रह गए। उन्होंने देखा कि कृष्ण अभी भी अपने मित्रों और बछड़ों के साथ खेल रहे हैं। ब्रह्मा जी भ्रमित हो गए। उन्होंने सोचा, "जो बालक मैंने गुफा में छुपाए थे, वे वहां भी हैं और यहाँ भी?" तभी श्री कृष्ण ने अपनी माया हटाई। ब्रह्मा जी ने देखा कि जितने भी ग्वाल-बाल और बछड़े थे, वे सब चतुर्भुज विष्णु के रूप में परिवर्तित हो गए और उनके चरणों में अनंत ब्रह्मांड झुक रहे हैं। ब्रह्मा जी का अहंकार और मोह पूरी तरह नष्ट हो गया। उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ कि वे उस परमात्मा की परीक्षा ले रहे थे जो स्वयं ज्ञान का स्रोत है। "हे प्रभु! मेरा अपराध क्षमा करें। मैं रजोगुण के प्रभाव में आकर आपको पहचान नहीं सका।" ब्रह्मा जी ने श्री कृष्ण की अद्भुत स्तुति की और साष्टांग प्रणाम किया। इसके बाद श्री कृष्ण ने अपनी माया समेटी और असली ग्वाल-बालों को वापस लाए, जिन्हें ऐसा लगा मानो वे केवल एक क्षण के लिए सोए थे। यह कथा हमें सिखाती है कि: अहंकार ज्ञान को ढक देता है स्वयं ब्रह्मा (ज्ञान के प्रतीक) भी अहंकार के कारण सत्य को नहीं देख पाए। कण-कण में वही परमात्मा विद्यमान है। तर्क और बुद्धि से परे केवल प्रेम और भक्ति के द्वारा ही ईश्वर को समझा जा सकता है। जय श्री राधेश्याम 🙏

Post media

Comments (5)

बरखा शर्मा null

बरखा शर्मा

Apr 25, 2026

jay shree radhe krishna radhe radhe ji shubh ratri 🙏🍁🌺🪴

vijay kushwaha

vijay kushwaha

Apr 25, 2026

जय श्री राधे कृष्ण