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*"जहाँ मृत्यु भी हार मान ले... वैकुण्ठ धाम का रहस्य"* 🕉️✨ *वैकुण्ठ = वि + कुण्ठा* *"जहाँ कोई कुंठा नहीं, कोई बाधा नहीं, कोई दुख नहीं"* - वही परम धाम है। *1. वैकुण्ठ क्या है? जगह नहीं, अवस्था है* तस्वीर में जो दिख रहा है वो *स्थूल वैकुण्ठ* है। असली वैकुण्ठ *चेतना की स्थिति* है। स्वर्ग vs वैकुण्ठ **स्वर्ग:** पुण्य खत्म होते ही वापस आना पड़ता है। इंद्र भी डरता है कि कोई तप करके उसकी गद्दी न छीन ले। वहां भी **मृत्यु है, ईर्ष्या है, कुंठा है**। **वैकुण्ठ:** **"यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम" - गीता 8:21**। जहाँ जाकर लौटना नहीं पड़ता। **न जन्म, न मृत्यु, न बुढ़ापा, न रोग**। सिर्फ आनंद। इसलिए मृत्यु भी वहाँ हार मान लेती है। *2. कौन पहुँचता है वैकुण्ठ? 4 क्वालिफिकेशन* 1. *अनन्य भक्ति:* *"जो केवल मेरा ध्यान करता है" - गीता 8:21*। मन में *दूसरा कोई न हो*। जैसे मीराबाई - जहर भी अमृत लगा। 2. *निष्काम कर्म:* फल की इच्छा बिना कर्म। जैसे *राजा भरत* - राज्य छोड़कर हिरण के मोह में फंसे तो हिरण बने। फिर अगले जन्म में *जड़ भरत* बनकर मोह छोड़ा और मुक्त हुए। 3. *शरणागति:* *"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज" - गीता 18:66*। गजेंद्र की तरह जब *पानी नाक तक आ जाए* तब "हे नाथ!" पुकारो। अहंकार डुबाकर। 4. *नाम जप:* कलियुग में *"कलौ तद्धरिकीर्तनात्"*। अजामिल ने मरते वक्त बेटे *"नारायण"* को पुकारा, यमदूत भाग गए, विष्णुदूत ले गए। *3. विरजा नदी: वैकुण्ठ का बॉर्डर* तस्वीर में जो नदी है वो *विरजा* है। ये *भौतिक जगत और आध्यात्मिक जगत* के बीच बहती है। - *विरजा = वि + रज* यानी जहाँ *रजोगुण, तमोगुण* नहीं। - आत्मा इसमें *स्नान करके सारे भौतिक शरीर, वासना, कर्म-बंधन* यहीं छोड़ देती है। - इसके पार *सिर्फ शुद्ध आत्मा* जाती है। इसलिए जय-विजय को भी *3 जन्म तक राक्षस बनना पड़ा* क्योंकि उन्होंने सनकादिकों को बिना स्नान के रोक दिया था। *4. पृथ्वी पर वैकुण्ठ: Earth's Vaikuntha* भगवान भक्त के लिए *वैकुण्ठ छोड़कर पृथ्वी पर आ जाते हैं*। इसलिए 4 धाम को *"धरती का वैकुण्ठ"* कहते हैं: 1. *बद्रीनाथ: धरती का बैकुंठ* - नर-नारायण ने तप किया। यहाँ *नर = मनुष्य, नारायण = भगवान* एक साथ हैं। कलियुग में *6 महीने बर्फ में बंद रहता है* - यानी भगवान भी तप करते हैं। 2. *जगन्नाथ पुरी: कलयुग का बैकुंठ* - यहाँ *कृष्ण, बलराम, सुभद्रा* काष्ठ के रूप में हैं। *बिना हाथ-पैर के* - क्योंकि भक्त के लिए *सबकुछ छोड़कर दौड़ते हैं*। यहाँ *छुआछूत नहीं, महाप्रसाद में सब बराबर*। 3. *द्वारकापुरी: कृष्ण का धाम* - कृष्ण ने *समुद्र के बीच सोने की द्वारका* बसाई। आज डूबी हुई है, पर *मान्यता है कि कलियुग के अंत में फिर प्रकट होगी*। यहाँ मृत्यु होने पर *मोक्ष निश्चित*। 4. *रंगनाथम/श्रीरंगम:* दक्षिण का वैकुण्ठ। भगवान *शेषनाग पर लेटे हैं* - जैसे परमधाम में। *5. जय-विजय का रहस्य: भगवान को भी प्रेम चाहिए* वैकुण्ठ के द्वारपाल जय-विजय को सनकादिक ऋषियों ने श्राप दिया। भगवान बोले: *"मेरे भक्त का अपमान मेरा अपमान"*। 2 विकल्प दिए: 1. *7 जन्म भक्त बनकर आओ* 2. *3 जन्म शत्रु बनकर आओ* उन्होंने *3 जन्म शत्रु बनना* चुना - *हिरण्यकशिपु-हिरण्याक्ष, रावण-कुंभकर्ण, शिशुपाल-दंतवक्र*। क्यों? *क्योंकि भगवान से दूर 7 जन्म नहीं रह सकते थे*। शत्रु बनकर भी *हर पल भगवान को याद किया, उनके हाथों मरे, और वापस वैकुण्ठ गए*। *सीधी बात:* भगवान को *गाली दो या ताली - बस याद करो*। वो रिश्ता निभाते हैं। *वैकुण्ठ कहाँ है?* *"न वैकुण्ठे न योगिनां हृदये न च वै दिवि। मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद"* *वैकुण्ठ न आकाश में है, न योगियों के दिल में। जहाँ मेरे भक्त मेरा नाम लेते हैं, मैं वहीं हूँ*। तो *घर में कीर्तन करो - घर वैकुण्ठ*। *मन में नाम जपो - मन वैकुण्ठ*। *दूसरे के दुख में मदद करो - कर्म वैकुण्ठ*। *मरने के बाद वैकुण्ठ मत ढूंढो। जीते जी बनाओ।* *|| ॐ नमो नारायणाय ||* *|| वैकुण्ठ नाथ की जय ||* आपको क्या लगता है - *मंदिर वाला वैकुण्ठ बड़ा या मन वाला वैकुण्ठ?* 👇

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