
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
168 days ago
ऐसे ही नहीं डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने माधव सदाशिव गोलवलकर को अपना उत्तराधिकारी चुना था। बीमारी के अंतिम दिनों में जब डॉक्टरजी कमजोर हो रहे थे, तब गुरुजी उनकी परछाई बन गए थे—सेवा, समर्पण और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण। एक दिन चर्चा हो रही थी कि व्रत का दिन कौन-सा है—सोमवार या मंगलवार? गुरुजी ने शांत स्वर में कहा: “मेरा तो एक ही वार है—हेडगेवार।” डॉ. हेडगेवार ने कई लोगों को परखा, पर अंततः उन्हें वही व्यक्ति मिला जो संघ के विचार, संगठन और राष्ट्रभाव को जीवन का ध्येय मान चुका था। इसीलिए 1939 में उन्होंने माधव सदाशिव गोलवलकर को सरकार्यवाह बनाकर अपने उत्तराधिकारी का संकेत दिया। इतिहास गवाह है—नेतृत्व पद से नहीं, समर्पण से बनता है।

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