MyMandirInstall

जब मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए और लंका के सुषेण वैद्य ने बताया कि उनके प्राण केवल हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत पर मिलने वाली संजीवनी बूटी से ही बच सकते हैं, तब हनुमान जी ने एक असंभव कार्य को संभव कर दिखाया। इस प्रसंग की कुछ प्रेरक और अद्भुत बातें: * अतुलनीय वेग: समय बहुत कम था, क्योंकि सूर्योदय से पहले बूटी पहुँचानी अनिवार्य थी। हनुमान जी ने पवन के वेग से उड़कर हजारों मील की दूरी तय की। * निर्णय क्षमता: जब हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत पहुँचे, तो वे संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाए क्योंकि पूरा पर्वत दिव्य औषधियों से चमक रहा था। समय व्यर्थ करने के बजाय, उन्होंने पूरा पर्वत ही हथेली पर उठा लिया। यह उनके त्वरित निर्णय और सामर्थ्य का प्रतीक है। * मार्ग की बाधाएं: रावण ने कालनेमि राक्षस को हनुमान जी को रोकने के लिए भेजा था, लेकिन अपनी बुद्धि और चातुर्य से हनुमान जी ने उसका वध किया और अपनी यात्रा जारी रखी। * भ्रातृ प्रेम और कर्तव्य: जब हनुमान जी पर्वत लेकर वापस लौट रहे थे, तब अयोध्या के ऊपर से गुजरते समय भरत जी ने उन्हें कोई शत्रु समझकर बाण मार दिया था। घायल होने के बावजूद हनुमान जी का ध्यान केवल लक्ष्मण जी के प्राण बचाने और श्री राम के कर्तव्य पर था। जैसे ही हनुमान जी संजीवनी लेकर पहुँचे, सुषेण वैद्य ने लक्ष्मण जी का उपचार किया और उनके प्राण लौट आए। यह प्रसंग हनुमान जी की अथाह शक्ति, बुद्धिमत्ता और अटूट सेवा भावना का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। सुविचार: > "संकट के समय घबराने के बजाय अपनी बुद्धि और शक्ति का सही दिशा में उपयोग करना ही सफलता की पहली सीढ़ी है।" >

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!