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शुभ प्रभात! आपका दिन मंगलमय हो। 🙏 **श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज** का यह संदेश सीधे हृदय को छूने वाला है। ### आज का सुविचार महाराज जी कहते हैं: > **"दूसरों से कठोर व्यवहार करने से गुरु और इष्ट के प्रति नीरसता आती है।"** > ### इस संदेश का सार यह विचार हमें सिखाता है कि हमारी आध्यात्मिकता केवल मंदिर या पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हमारे व्यवहार में झलकनी चाहिए: * **जुड़ाव की डोर:** जब हम दूसरों के प्रति कठोर होते हैं, तो हमारे मन में नकारात्मकता घर कर लेती है। यही नकारात्मकता धीरे-धीरे हमें अपने गुरु और ईश्वर (इष्ट) के प्रति प्रेम और आनंद से दूर कर देती है। * **कोमलता का महत्व:** भक्ति का मार्ग सरलता और विनम्रता का है। यदि हम दूसरों के प्रति दयालु रहेंगे, तो हमारा मन शांत रहेगा और हम ईश्वर की कृपा को बेहतर ढंग से महसूस कर पाएंगे। * **प्रतिबिंब:** हम दूसरों के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, वैसा ही भाव हमारे भीतर विकसित होता है। कठोरता भक्ति के 'रस' को सुखा देती है। आज 14 अप्रैल

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