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गरबे के आध्यात्मिक, ज्योतिषीय और ब्रह्मांडीय स्वरूप को बहुत ही सुंदर गरबे से जुड़े इन विशेष रहस्यों और मान्यताओं * **गरबा और ब्रह्मांड का प्रतीक:** गरबे के छिद्रित मिट्टी के घड़े (जिसे 'गरबी' या 'गर्भ दीप' कहा जाता है) को संपूर्ण ब्रह्मांड और माँ जगदंबा (आदि शक्ति) का स्वरूप माना जाता है। इसमें जलता हुआ दीपक इस ब्रह्मांड की ऊर्जा और चेतना का प्रतीक है। * **27 छिद्र और 27 नक्षत्र:** पारंपरिक गरबे के घड़े में कुल 27 छिद्र (छेद) होते हैं, जिन्हें नौ-नौ की तीन पंक्तियों (9 × 3 = 27) में व्यवस्थित किया जाता है। हिंदू ज्योतिष और खगोल विज्ञान में कुल **27 नक्षत्र** माने गए हैं, और ये 27 छिद्र उन्हीं 27 नक्षत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। * **नक्षत्रों के चरण और 108 की संख्या:** ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं। जब 27 नक्षत्रों को उनके 4 चरणों से गुणा किया जाता है (27 \times 4), तो यह संख्या **108** बनती है। * **108 परिक्रमा का पुण्य:** सनातन संस्कृति में '108' की संख्या को बेहद पवित्र और पूर्ण माना जाता है (जैसे जप माला में 108 मनके होते हैं)। इसी मान्यता के आधार पर, नवरात्रि के दौरान गरबे (घड़े) को बीच में रखकर उसके चारों ओर 108 बार घूमने या गरबा खेलने से पूरे ब्रह्मांड की 108 परिक्रमा करने के समान आध्यात्मिक पुण्य और ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह विवरण गरबे को केवल एक नृत्य न मानकर ब्रह्मांडीय विज्ञान, ज्योतिष और गहरी आस्था का एक अद्भुत संगम साबित करता है।

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