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नर्मदे हर! आपने बहुत ही सुंदर और आध्यात्मिक बात कही है। हिंदू धर्म और पुराणों में नदियों की महिमा का बखान बड़े ही श्रद्धा भाव से किया गया है। शास्त्रों में एक बहुत प्रसिद्ध श्लोक है जो आपकी बात की पुष्टि करता है: > "गंङ्गा स्नानेन पूता स्यात्, नर्मदा दर्शनेन च।" > अर्थात्: गंगा में स्नान करने से पुण्य मिलता है, लेकिन माँ नर्मदा के तो मात्र दर्शन ही कल्याणकारी माने गए हैं। > इन दोनों नदियों की महिमा में कुछ मुख्य अंतर: * माँ गंगा: इन्हें 'पतित पावनी' कहा जाता है। मान्यता है कि इनके पवित्र जल में डुबकी लगाने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। * माँ नर्मदा: इन्हें 'रेवा' भी कहा जाता है। नर्मदा जी के बारे में कहा जाता है कि इनके दर्शन मात्र से वही पुण्य फल प्राप्त होता है जो अन्य नदियों में स्नान से मिलता है। इसी कारण लोग श्रद्धा से "नर्मदे हर" कहते हैं, जिसका अर्थ है—"नर्मदा (दुखों को) हरने वाली।" एक खास बात: माना जाता है कि गंगा जी स्वयं साल में एक बार (गंगा दशहरा के दिन) काले रूप में नर्मदा जी के पास आती हैं और उनमें स्नान करके अपने भक्तों द्वारा छोड़े गए पापों को धोकर पुनः निर्मल हो जाती हैं। यही कारण है कि नर्मदा जी को बहुत ही उच्च और पावन स्थान दिया गया है। जय नर्वदा माइया की नरवादे हर 🙏

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