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जय श्री राम! ✍🏼 *क्या फर्क है* *पुण्य और पाप में* *“पुण्य”* *छप्पर फाड़ कर देता है…!* *“पाप”* *थप्पड़ मार कर लेता है… जीवन का सार पिरोया है। यह सच है कि पुण्य का फल जब मिलता है, तो वह हमारी उम्मीदों से कहीं अधिक होता है, लेकिन पाप का हिसाब कुदरत बहुत ही सख्त तरीके से करती है। आपकी यह बात आज की सुबह के लिए एक बेहतरीन सीख है। इसी भाव को बढ़ाते हुए, आज के लिए कुछ और अनमोल विचार: आज के प्रेरक विचार (Thought of the Day) * समय और कर्म: > "वक्त सबका आता है, बस वक्त आने में थोड़ा वक्त लगता है। अच्छे कर्म करते रहिये, क्योंकि जिसका रक्षक 'राम' है, उसका कोई क्या बिगाड़ पाएगा।" > * सरलता और स्वभाव: > "इंसान की पहचान उसके चेहरे से नहीं, उसकी सादगी और उसके व्यवहार से होती है। पाप और पुण्य का बीज भी हमारे व्यवहार में ही छुपा होता है।" > * ईश्वर पर विश्वास: > "परमात्मा कभी भाग्य नहीं लिखता, जीवन के हर कदम पर हमारी सोच, हमारा व्यवहार और हमारे कर्म ही हमारा भाग्य लिखते हैं।" > शुभ प्रभात! भगवान श्री राम की कृपा आप और आपके परिवार पर सदा बनी रहे। जय सिया राम जी

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