
SHREE SHARMA
430 days ago
काली तारा महाविद्या षोडशी भुवनेश्वरी। वगला छिन्नमस्ता च विद्या धूमावती तथा॥ मातङ्गी त्रिपुरा चैव विद्या च कमलात्मिका। एता दश महाविद्याः सिद्धविद्याः प्रकीर्तिताः॥ भक्त्या सम्भजतां नित्यं चतुर्वर्गफलप्रदाः । सर्वाभीष्टप्रदायिन्यः साधकानां महेश्वर ॥ काली (महाकाली), तारा, महाविद्या षोडशी, भुवनेश्वरी, वगलामुखी, छिन्नमस्ता, धूमावती, मातङ्गी, त्रिपुरा व कमलात्मिका (कमला), ये दस महाविद्याएँ सिद्धविद्याएँ हैं। भगवती सतीजी भगवान् शिवसे कहती है,हे महेश्वर! ये देवियाँ नित्य भक्तिपूर्वक उपासना करनेवाले साधक पुरुषोंको चारों प्रकारके पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) तथा समस्त वाञ्छित फल प्रदान करती हैं।

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