
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
10 days ago
11.9.2026 *"चाहे पति-पत्नी हों, चाहे दो मित्र हों, चाहे पिता पुत्र हों, या कोई भी दो व्यक्ति हों। यदि आपस में बिना कारण व्यर्थ में ही एक दूसरे पर शंका करेंगे, तो दोनों को हानि होगी।"* क्योंकि मनोविज्ञान का यह सामान्य नियम है, कि *"जैसा व्यवहार आप दूसरों के साथ करेंगे, वैसा ही दूसरे लोग भी आपके साथ करेंगे। इसलिए बहुत सोच समझकर व्यवहार करना चाहिए।"* *"यदि आप दूसरे व्यक्ति पर विश्वास करेंगे, तो दूसरा व्यक्ति भी आप पर विश्वास करेगा। इस प्रकार से दोनों सुखी रहेंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (4)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Sep 11, 2026
Good afternoon ji 🙏🌹🙏

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Sep 11, 2026
राधे राधे जी जय श्री कृष्णा 🙏

सविता
Sep 11, 2026
Radhe radhe 🙏🌹

