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*🕉️मंगला गौरी व्रत 2026: सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत आज, अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनें जरूर करें ये काम!🕉️* 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱 *🪦सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा पाने का सबसे शुभ समय माना गया है. आज का दिन शिव-पार्वती के भक्तों के लिए बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आया है.* *आज सावन मास का दूसरा मंगला गौरी व्रत तो है ही, साथ ही सावन शिवरात्रि का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत मुख्य रूप से माता पार्वती (मां गौरी) को समर्पित है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं. वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए मां गौरी का पूजन करती हैं. आइए जानते हैं आज के दिन की पूजा विधि और वे खास काम जो सुहागिन महिलाओं को जरूर करने चाहिए.* *📿मंगला गौरी व्रत का महत्व* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. इसी वजह से मां गौरी की पूजा को वैवाहिक सुख और मनचाहे जीवनसाथी की कामना से जोड़कर देखा जाता है. सुहागिन महिलाएं मंगला गौरी व्रत में मां पार्वती की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं. वहीं अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रख सकती हैं. *📿अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनें करें ये काम* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* मंगला गौरी व्रत के दिन स्नान करने के बाद पूजा का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके मां गौरी और भगवान शिव की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. मां गौरी को लाल या पीले रंग के वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसके साथ सिंदूर, अक्षत, फूल, माला, फल, मिठाई और सुहाग की सामग्री अर्पित करें. सुहागिन महिलाएं मां गौरी को चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, सिंदूर औरबाकी सुहाग सामग्री भी अर्पित कर सकती हैं. पूजा के दौरान मां गौरी का ध्यान करते हुए अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की दीर्घायु की कामना करें. इसके बाद माता पार्वती की आरती करें और व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें. *📿मां गौरी को सुहाग सामग्री चढ़ाने की परंपरा* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* मंगला गौरी व्रत में सुहाग सामग्री का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां गौरी को सुहाग की वस्तुएं अर्पित करने से अखंड सौभाग्य की कामना पूरी होती है. इस दिन महिलाएं मां गौरी को सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, कंघी, चुनरी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित कर सकती हैं. पूजा के बाद इनमें से कुछ सामग्री को प्रसाद स्वरूप अपने लिये जाता है और कुछ सामग्री को किसी सुहागिन महिला को देना शुभ माना जाता है. *📿शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत का संयोग* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* इस बार 11 अगस्त को मंगला गौरी व्रत के साथ सावन शिवरात्रि भी पड़ रही है. सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष दिन माना जाता है. ऐसे में आज शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करना भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है. सुहागिन महिलाएं मंगला गौरी व्रत के दौरान मां पार्वती की पूजा करने के साथ भगवान शिव का भी जलाभिषेक कर सकती हैं. शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित करके भगवान शिव का ध्यान करें. मान्यता है कि शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना से दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख-शांति की कामना की जाती है. *♿#ऊँ_श्रीगौरीशंकराय_नम:♿* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱

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Comments (2)

सविता

सविता

Aug 11, 2026

bahut Uttam jankari 🙏🙏

सविता

सविता

Aug 11, 2026

om namah shivay 🙏🌹