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*🕉️संतान सप्तमी 2026: क्यों बनाए जाते हैं गुड़-आटे से बने 7 मीठे पूए? पूजा में अंक '7' का क्या है धार्मिक महत्व🕉️* 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱 *🪦भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को 'संतान सप्तमी' का पवित्र व्रत रखा जाता है। इस व्रत को हम ललिता सप्तमी के नाम से भी जानते हैं। उदयातिथि के हिसाब से इस साल 18 सितंबर 2026 को यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और जीवन में तरक्की के लिए रखेंगी।* *इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। लेकिन, आपने अक्सर देखा होगा कि इस पूजा में एक चीज सबसे खास होती है गुड़ और आटे से बने 7 मीठे पूए। लेकिन, क्या आपने कभी गौर किया है कि आखिर 7 पूए ही क्यों? और, अनुष्ठान में इस '7' की संख्या का क्या रहस्य है? आइए समझते हैं अंक 7 का गणित।* *📿गुड़ और आटे के पूए ही क्यों?* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ के लिए सात्विक और शुद्ध चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। गेहूं का आटा जीवन, मजबूती और पोषण का प्रतीक है, जबकि गुड़ मिठास और अच्छी सेहत (आरोग्य) का। ऐसा माना जाता है कि भगवान को गुड़-आटे का भोग लगाने से संतान के जीवन में हमेशा मिठास बनी रहती है। *📿पूजा में '7' की संख्या का धार्मिक महत्व* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* `संतान सप्तमी के व्रत में '7' अंक का बड़ा ही गहरा आध्यात्मिक महत्व है:-` * यह व्रत सप्तमी तिथि यानी पखवाड़े के सातवें दिन मनाया जाता है, इसलिए इसमें सात की संख्या प्रधान होती है। * इसके अलावा, सनातन धर्म में '7' का अंक बेहद शुभ और पूर्ण माना गया है, जैसे विवाह के 7 फेरे, 7 जन्म, 7 ऋषि (सप्तर्षि), 7 सुर और शरीर के 7 चक्र। * पूजा के दौरान जो डोरा (धागा) भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित किया जाता है, उसमें भी 7 गांठें ही लगाई जाती हैं। बाद में माताएं इसी डोरे को रक्षा सूत्र के रूप में अपनी संतान की कलाई या अपने गले में बांध लेती हैं। * पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के लिए कुल 21 मीठे पूए बनाए जाते हैं। इनमें से 7 पूए भगवान को भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं, 7 पूए ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान कर दिए जाते हैं। बाकी बचे 7 पूओं को प्रसाद के रूप में खाकर माताएं अपना व्रत खोलती हैं। *♿#ऊँ_श्रीगौरीशंकराय_नम:♿* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱

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