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यह कथा बहुत कम लोगों को ज्ञात है कि शूर्पणखा के अतिरिक्त एक और राक्षसी थी, जिसके नाक-कान लक्ष्मण ने काटे थे। इसका वर्णन वाल्मीकि रामायण के अरण्यकाण्ड में मिलता है और उस राक्षसी का नाम था अयोमुखी। माता सीता के हरण के बाद श्रीराम और लक्ष्मण उनकी खोज में वन-वन भटक रहे थे। मार्ग में उन्हें घायल अवस्था में जटायु मिले, जिन्होंने रावण द्वारा सीता-हरण का समाचार दिया और फिर प्राण त्याग दिए। दोनों भाइयों ने विधिपूर्वक उनका अंतिम संस्कार किया और सीता जी की खोज में आगे बढ़ चले। खोज करते-करते वे पश्चिम दिशा में स्थित एक घने और निर्जन वन में पहुँचे, जिसे क्रौंचारण्य कहा जाता था। यह वन अत्यंत रमणीय था, किंतु वहाँ मनुष्यों का आना-जाना नहीं था। अनेक पशु-पक्षी वहाँ निवास करते थे, परन्तु माता सीता का कहीं पता नहीं चला। आगे बढ़ते हुए वे महर्षि मतंग के आश्रम के समीप पहुँचे। वहाँ उन्हें एक अत्यंत गहरी और अंधकारमय गुफा दिखाई दी, जो मानो पाताल का द्वार हो। यह सोचकर कि संभव है सीता जी वहाँ हों, दोनों भाई उस गुफा के निकट गए। तभी उनकी दृष्टि एक भयानक राक्षसी पर पड़ी। उसका शरीर विशाल और विकराल था, तथा उसका रूप इतना भयावह था कि कोई भी जीव उसके पास जाने का साहस नहीं करता था। उस राक्षसी का नाम अयोमुखी था। जब उसने लक्ष्मण को देखा, तो उनके सौंदर्य पर मोहित हो गई। उसने निर्लज्ज होकर लक्ष्मण से प्रेम-प्रस्ताव रखा और उनके साथ रमण करने की इच्छा व्यक्त की। लक्ष्मण ने उसकी बातों को अनसुना कर आगे बढ़ना चाहा, लेकिन अयोमुखी ने उनका हाथ पकड़ लिया और बलपूर्वक उन्हें अपनी भुजाओं में जकड़ लिया। वह बोली— “मेरा नाम अयोमुखी है। मैं तुम पर आसक्त हो चुकी हूँ। मेरे साथ रहो, मेरे पति बनो। हम पर्वतों और कंदराओं में विचरण करते हुए सुखपूर्वक जीवन बिताएँगे।” पहले से ही सीता जी के वियोग में दुःखी लक्ष्मण इस दुस्साहस से अत्यंत क्रोधित हो उठे। उन्होंने तत्काल अपनी तलवार निकाली और अयोमुखी के नाक, कान तथा स्तनों को काट डाला। असहनीय पीड़ा से तड़पती हुई वह राक्षसी चीखती-चिल्लाती अपनी गुफा में भाग गई। इसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण पुनः माता सीता की खोज में आगे बढ़ गए। रामायण में अयोमुखी का उल्लेख केवल इसी प्रसंग में मिलता है। उसके पूर्व जीवन या उसके बाद की कोई अन्य कथा ग्रंथों में वर्णित नहीं है। यही कारण है कि यह प्रसंग रामायण के कम चर्चित किंतु अत्यंत रोचक रहस्यों में से एक माना जाता है। 🚩🙏 जय श्री कृष्ण🌺🌺🌹🌹

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