
SHREE SHARMA
401 days ago
जब जब होई धरम कै हानी, बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी, करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी सीदहिं बिप्र धेनु सुर धरनी, तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा, हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु जग बिस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं और वे ऐसा अन्याय करते हैं कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता तथा ब्राह्मण, गो, देवता और पृथ्वी कष्ट पाते हैं, तब-तब वे कृपानिधान प्रभु भाँति-भाँति के दिव्य शरीर धारण कर सज्जनों की पीड़ा हरते हैं, वे असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, अपने श्वास रूप वेदों की मर्यादा की रक्षा करते हैं और जगत् में अपना निर्मल यश फैलाते हैं, रामजी के अवतार का यही कारण है जय सियाराम 🙏

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