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Rama Devi Sahu

166 days ago

भोजन का सम्मान करें भगवान का शुक्रिया अदा करें

Comments (4)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 17, 2026

Ye bhi Bahut hi Gurutwpurna Baatein 👌👌 Bahut bahut Dhanyawad Jii 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 17, 2026

Bahut hi Upakaarii Baatein 👌👌 Dhanyawad 🙏 Prabhu Aap ko Kalyan Kare 🙏

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Mar 17, 2026

भोजन से पहले कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए हमारे शास्त्रों में बहुत ही सुंदर श्लोक और विचार दिए गए हैं। यहाँ कुछ प्रमुख विकल्प दिए गए हैं जिनका आप उपयोग कर सकते हैं: १. सबसे प्रचलित भोजन मंत्र यह श्लोक भोजन को एक 'यज्ञ' की तरह पवित्र मानता है: > ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्। > ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥ > अर्थ: अर्पण (हवन सामग्री डालने का पात्र) ब्रह्म है, हवि (आहुति) ब्रह्म है, ब्रह्म रूपी अग्नि में ब्रह्म (कर्ता) के द्वारा जो आहुति दी गई है, वह भी ब्रह्म ही है। जो मनुष्य हर कर्म में ब्रह्म को देखता है, उसे ब्रह्म की ही प्राप्ति होती है। २. अन्न के प्रति सम्मान का मंत्र भोजन शुरू करने से पहले अन्नपूर्णा माता और ईश्वरीय शक्ति को याद करने के लिए: > अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे। > ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥ > अर्थ: हे माता अन्नपूर्णा! आप सदा पूर्ण हैं और भगवान शिव की प्रिय हैं। हमें ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए भोजन (भिक्षा) प्रदान करें। ३. एक सरल हिंदी सुविचार यदि आप सरल शब्दों में धन्यवाद देना चाहते हैं, तो यह भाव बहुत सुंदर है: * "हे ईश्वर, आपका कोटि-कोटि धन्यवाद कि आपने आज हमें यह अन्न प्रदान किया। उन हाथों को भी आशीष दें जिन्होंने इसे उगाया और जिन्होंने इसे प्रेम से बनाया। यह भोजन हमारे शरीर को शक्ति और मन को शुद्धि प्रदान करे।" कुछ छोटी मगर महत्वपूर्ण बातें: * मौन का महत्व: भोजन के पहले कुछ सेकंड का मौन मन को शांत करता है और पाचन में मदद करता है। * जमीन पर बैठकर भोजन: यह न केवल हमारी परंपरा है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत लाभकारी माना जाता है।

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Mar 17, 2026

यह विचार बहुत ही गहरा और सात्विक है। भोजन केवल शरीर का पोषण नहीं करता, बल्कि यह हमारे संस्कारों और कृतज्ञता का भी प्रतीक है। प्राचीन परंपराओं में भी कहा गया है—"अन्नं ब्रह्म" अर्थात् अन्न ही ब्रह्म है। जब हम भोजन का सम्मान करते हैं और ईश्वर को धन्यवाद देते हैं, तो वह भोजन हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करता है। भोजन के प्रति सम्मान प्रकट करने के कुछ सरल तरीके यहाँ दिए गए हैं: * बर्बादी से बचें: थाली में उतना ही लें जितनी भूख हो। अन्न का एक दाना फेंकना भी किसी भूखे का हक छीनने जैसा है। * प्रार्थना (भोजन मंत्र): भोजन शुरू करने से पहले एक क्षण का मौन रखकर उस परम शक्ति और उन किसानों को धन्यवाद देना, जिनकी मेहनत से यह भोजन हमारी थाली तक पहुँचा है। * एकाग्रता से भोजन: भोजन करते समय शांत रहना और खाने के स्वाद व बनावट पर ध्यान देना पाचन और स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहतर होता है। * स्वच्छता का ध्यान: साफ़ हाथों और शुद्ध मन से किया गया भोजन अमृत के समान होता है।