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*सनातन पुनरुत्थान का प्रतीक – भोजशाला* भोजशाला भारतीय ज्ञान परम्परा और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, जिसका संबंध परमार नरेश राजा भोज से जुड़ा है। यह स्थल विद्या और साधना की अधिष्ठात्री माता सरस्वती को समर्पित था जहां संस्कृत और शास्त्रीय विमर्श की परम्परा जीवित थी। यहां प्राप्त शिलालेख और स्थापत्य भारतीय कला एवं विद्वता की गहरी छाप प्रस्तुत करते है, जो भारत की बौद्धिक समृद्धि का प्रमाण माने जाते है। इस्लामिक आक्रमणकारियों के कब्जे के विरुद्ध हाल ही में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस बात की भी पुष्टि की यह हिंदू आराध्य स्थल ही है, जो सदियों से यहां अवस्थित है। *मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩*

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