
SHREE SHARMA
240 days ago
🕉️ नाम्नामकारि बहुधा निजसर्वशक्ति- स्तत्रापिंता नियमितः स्मरणे न कालः । एतादृशी तव कृपा भगवन् ममापि दुर्दैवमीदृशमिहाजनि नानुरागः ॥ ➖ श्रीचैतन्य शिक्षाष्टक २ ❝हे प्रभो ! आपने अपने नाममें अपनी समस्त शक्ति निहित कर दी है और आपकी दयालुता इतनी है कि अपने नामका स्मरण करनेके लिये कोई समय भी नियत नहीं किया है। आपकी मुझपर इतनी असीम कृपा है, पर मेरा यह दुर्भाग्य कि अभी तक आपके नाममें मुझे अनुराग उत्पन्न नहीं हुआ ।❞ 🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿

Comments (2)

Suman ✨
Jan 2, 2026
Jai Shree Krishna 🙏🌷
