
SHREE SHARMA
238 days ago
🙏🌹जय श्री राम🌹🙏 "जो जेहि भाये रहा अभिलाषी! तेहि तेहि के तस तस रूचि राखी!! जो जिस भावना से प्रभु श्री राम का भजन करता है.श्री राम उसको उसी भावना से मिलते हैं.रावन ने शत्रु भाव माना उसे शत्रु बनकर मिले.विभीषण ने मित्र भाव से माना उसे मित्र बनकर मिले.ना राम शत्रु हैं न मित्र हैं.वह तो एक विमल दर्पण मात्र हैं.राम के सन्मुख होकर जीव को अपना यथार्थ स्वरुप दीख जाता है.भावना के अनुसार ही फिर वह व्यहवार भी करते हैं.जिसका जैसा व्यहवार होता है उससे वह वैसा ही व्यहवार करते हैं. श्री राम ने वनवास काल में तीन मित्र बनाए.सुग्रीव,विभीषण और निषाद.सुग्रीव और विभीषण ने घर राज्य तो अपना माना परन्तु श्री राम से उसे पवित्र करने के लिए कहा.सुग्रीव भी कहते हैं- "रिपु सम मोहि मारेसि अति भारी,हरि लीन्हेसी सर्वश अरु नारी". अर्थात मेरा घर द्वार स्त्री और सब बालि ने छीन लिया है.कृपा कर आप दिलाएं.और विभीषण लंका विजय के बाद प्रभु से प्रार्थना करते हैं- "अब जन गृही पुनीत प्रभु कीजै,मज्जन करिय समर श्रम छीजै". अर्थात हे श्रीराम! कुछ देर आराम कर युद्ध की थकावट दूर करें और मेरे घर को पवित्र करें. अब विचारणीय बात यहाँ यह है कि दोनों ही घर और राज्य को अपना मानते हैं.परन्तु श्री राम से वहां चरण रखने की प्रार्थना करते हैं.अब देखिये एक मित्र "निषादराज" को भी प्रभु ने मित्र बनाया.और वह भी प्रभु से प्रार्थना करता है- "देव धरणी धर धाम तुम्हारा,मैं जनु नीच सहित परिवारा. कृपा करिय पुर धारिय पाऊ,थापिय जनि सब लोग सिहाऊ". अर्थात यह पृथ्वी घर राज्य धन सबकुछ आपका है.मैं परिवार सहित आपका सेवक हूँ.कृपा करके आप अपने राज्य में चलें. अर्थात निषाद सबकुछ प्रभु श्रीराम का मानता है.और विभीषण और सुग्रीव सब कुछ अपना मानते हैं.अब जब रामराज्याभिषेक हुआ.सुग्रीव सहित सब वानरों से प्रभु ने कह दिया- "अब गृह जाहू सखा सब,भजहूँ मोहि दृढ नेम. सदा सर्वगत सर्वहित,जानी करेहू अति प्रेम" विभीषण सामने आये उनसे भी कह दिया जाओ लंका में एक कल्प तक राज्य करो.अर्थात अयोध्या में रहने नहीं दिया.न कभी दोनों को वापिस आने के लिए कहा. "करेहू कल्प भरी राज्य तुम्ह,मोहि सुमरेहू मन माहि. पुनि मम धाम जाहियेऊ,जहाँ संत सब जाहीं". क्योंकि सुग्रीव ने किष्किन्धा को और विभीषण ने लंका को अपना राज्य मान रखा था.प्रभु ने वहीँ भेज दिया अयोध्या वापिश आने तक को नहीं कहा. लेकिन जब निषादराज सामने आये इस मित्र ने सबकुछ प्रभु का माना था.प्रभु श्री राम इस मित्र से क्या कहते हैं- "तुम मम सखा भरत सम भ्राता,सदा रहेउ पुर आवत जाता". अर्थात हे मेरे मित्र निषादराज! तुम मेरे मित्र ही नहीं भरत के समान भाई हो.क्योंकि तुमने अपना राज्य मेरा माना था इसीलिए अयोध्या भी तुम्हारा है तुम सदा अयोध्या आते जाते रहना.अयोध्या पर तुम्हारा अधिकार मेरे और भरत के समान ही है. 🙏🌹जय सिया राम🌹🙏

Comments (7)

SHREE SHARMA
Jan 3, 2026
दीदी प्रणाम 🙏🙏

Saumya Sharma
Jan 3, 2026
जय श्री राम 🙏 जय बजरंगबली 🙏 जय शनिदेव 🙏 आपको सदैव राम जी का आशीर्वाद, बजरंगबली का साथ और शनिदेव जी की शीतल छाया प्राप्त हों 🙏 राम जी की कृपा से आप स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपनों के साथ हँसते मुस्कुराते रहें 🙏 🌹☺️ इसी शुभकामना के साथ शुभ रात्रि विश्राम भाई जी 🙏🌹☺️

Suman ✨
Jan 3, 2026
Jai Shree Ram 🙏🌷

Radhe Radhe
Jan 3, 2026
‼️जय श्री राम जय बजरंगबली। शनिवार वंदन जी।।‼️
