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25.7.2026 *"जो व्यक्ति सभ्यता नम्रता दूसरों के प्रति सहानुभूति दया दान सबके साथ अच्छा व्यवहार करना आदि इन उत्तम गुणों का सम्मान करता है। उस व्यक्ति में ऐसे उत्तम गुण विकसित होते हैं, और जीवन भर उसकी उन्नति कराने में सहयोगी होते हैं।"* ये गुण कहां से आते हैं? *"पूर्व जन्मों से संस्कार के रूप में प्रत्येक व्यक्ति के साथ आते हैं।" "ऐसे गुण थोड़ी बहुत मात्रा में सभी में होते हैं। परंतु जो व्यक्ति इन गुणों का महत्व समझता है, इनको पल्लवित पुष्पित करता है, उसमें तो ये गुण स्थिर हो जाते हैं।" "और जो व्यक्ति पूर्व जन्म से प्राप्त इन उत्तम गुणों का सम्मान नहीं करता। इनको पल्लवित पुष्पित नहीं करता। उसमें ये गुण धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।" "और यदि वह व्यक्ति अधिक लापरवाही करे, तो झूठ छल कपट चोरी बेईमानी धोखाधड़ी आदि पूर्व जन्म से आए इन बुरे संस्कारों से चारों ओर से घिर जाता है, और धीरे-धीरे दुष्ट लोगों की संगति से वह बिगड़ जाता है। उसका जीवन नष्ट हो जाता है।"* *"इसलिए सदा सावधान रहें। उत्तम गुणों का सम्मान करें, अपने जीवन में उनका विकास करें। तभी आप सुख पूर्वक जीवन जी पाएंगे, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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