
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
58 days ago
*जय माँ ज्वाला * 🙏🔥 *ध्यानू भक्त और अकबर के छत्र की कथा* हिमाचल के प्रसिद्ध ज्वाला जी शक्तिपीठ से जुड़ी है। ये 16वीं शताब्दी, मुगल बादशाह अकबर के समय की घटना है। *1. ध्यानू भक्त कौन थे?* ध्यानू भक्त नादौन गांव, ब्रज प्रदेश के रहने वाले माँ ज्वाला जी के परम भक्त थे। हर साल ये 1000 भक्तों के जत्थे के साथ माँ ज्वाला जी के दर्शन के लिए जाते थे। f2f0ae75 *2. अकबर से मुलाकात और परीक्षा* एक बार जब ध्यानू भक्त 1000 यात्रियों के साथ ज्वाला जी जा रहे थे, तो दिल्ली के चांदनी चौक में अकबर के सिपाहियों ने उन्हें रोक लिया। अकबर ने दरबार में बुलाकर पूछा - "इतने लोगों को कहाँ ले जा रहे हो?" f2f0 ध्यानू ने बताया कि "माँ ज्वाला देवी के दर्शन को जा रहे हैं। माँ संसार की निर्माता हैं, सच्चे भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। उनके मंदिर में बिना तेल-बाती के ज्योति जलती रहती है"। f2f0 अकबर को विश्वास नहीं हुआ। उसने परीक्षा लेने के लिए ध्यानू के घोड़े का सिर कटवा दिया और कहा - "अपनी देवी से कहो इसे जिंदा कर दे"। f2f0ae75 ध्यानू ने 1 महीने का समय मांगा और माँ ज्वाला जी पहुंचे। वहाँ रातभर जागरण किया, प्रार्थना की। जब माँ प्रकट नहीं हुईं तो ध्यानू ने अपना शीश काटकर माँ के चरणों में अर्पित कर दिया। ae759ed4 तब माँ कन्या रूप में प्रकट हुईं, ध्यानू का शीश जोड़ दिया और आशीर्वाद दिया कि आज से शीश के स्थान पर नारियल की भेंट स्वीकार करेंगी। उधर दिल्ली में मरा हुआ घोड़ा भी जिंदा हो गया। 9ed4ce52 *3. अकबर का अहंकार और माँ की शक्ति* अकबर ने ज्वाला बुझाने की कोशिश की। लोहे के मोटे तवे रखवाए, नहर का पानी छुड़वाया, पर ज्योति नहीं बुझी। हारकर अकबर खुद नंगे पैर, कंधे पर सवा मन यानी 50 किलो सोने का छत्र लेकर ज्वाला जी आया। 9ed4ce52 *4. अकबर का छत्र* जैसे ही अकबर ने छत्र चढ़ाना चाहा, वो उसके हाथ से गिरकर टूट गया और सोना किसी अज्ञात धातु में बदल गया - न लोहा, न पीतल, न तांबा, न सीसा। माँ ने अहंकारी राजा का दान स्वीकार नहीं किया। अकबर ने क्षमा मांगी। ce52a143 *आज भी वो खंडित छत्र ज्वाला जी मंदिर के बांई ओर रखा है*। इसे देखकर लोग मानते हैं कि माता के दर पर सबसे बड़ी शक्तियां भी नतमस्तक हैं। ce52a143 *5. टेढ़े मंदिर और तपोस्थली* ज्वाला जी यात्रा में "अकबर के छत्र का इतिहास, भगत ध्यानू जी की तपोस्थली और टेढ़े मंदिर" के दर्शन होते हैं। ध्यानू भक्त की तपोस्थली भी यहाँ है। 7709 *सार*: ये कथा भक्ति की शक्ति और अहंकार के टूटने का प्रतीक है। अकबर जैसा शक्तिशाली बादशाह भी माँ की अखंड ज्योति के आगे झुक गया, पर माँ ने उसका सोना स्वीकार नहीं किया - क्योंकि भक्ति में अहंकार नहीं चलता। बोलो *ज्वाला माई की जय* 🔥
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